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शाम-ए-गजल से गुलिस्तां हुआ टैगोर थियेटर

Wed, 19 Mar 2014 04:05 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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सांस्कृतिक कार्य विभाग, हरियाणा की तरफ से टैगोर थियेटर में ‘शाम-ए-गजल’ का आयोजन किया गया।
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कार्यक्रम में प्रसिद्ध गजल गायक चंदन दास, तोसीफ अख्तर और कुमारी राधिका चोपड़ा ने अपनी गजलों से सभी का दिल जीत लिया। कार्यक्रम की शुरुआत राधिका चोपड़ा ने की जिन्होंने अपनी गजल ‘न सोचा न समझा न सिखा न जाना’ से की।

इसके बाद उन्होंने अपनी अगली गजल ‘आपकी याद आती रही रात को’ गाया तो लोगों ने तालियों से दाद दी। इसके बाद तोसीफ अख्तर ने अपनी गजल इश्क करो, ठहरी ठहरी तबियत में रवानी आई और जगजीत सिंह की गजल आहिस्ता आहिस्ता पेश की।
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अंत में चंदन दास ने जब ‘न जी भर के देखा न कुछ बात की’ गाया तो थियेटर तालियों से गूंज उठा। इसके बाद उन्होंने कई गजलें पेश कीं।

आसान शब्दों में गाने का मजा कुछ और है - चंदन दास
शाम-ए-गजल में शामिल हुए प्रसिद्ध गजल गायक चंदन दास ने कार्यक्रम के बाद बातचीत में अपनी गजल गायकी के सफर के बारे में कई बातें शेयर कीं।

उन्होंने बताया कि बंगाली परिवार में पला बढ़ा हूं। गाने का शौक शुरू से था। तब मुझे तलतमहमूद और मेहंदी हसन को सुनने में बहुत आनंद आता था। इसी वजह से गजल गाने लगा। 1982 में जब दिल्ली में था, तब किसी से सुना था कि मुंबई में गजल गायक की बहुत मांग है।

यह सुन मुंबई गया तो वहां अपनी पहली एल्बम ‘इंट्रोड्यूसिंग चंदन दास’ निकाली। इससे मुझे पहचान मिली। उन्होंने कहा कि मुझे शुरू से ही आसान शब्दों में गाना बहुत अच्छा लगता है क्योंकि इसे सुनने के बाद श्रोता जल्दी जुड़ता है और आनंद लेता है।

उन्होंने कहा कि आजकल संगीत का दायरा काफी बढ़ गया है। इसमें गजलों का स्कोप काफी अच्छा है । लेकिन आजकल एल्बम का जमाना नहीं रहा इसलिए कोई नई एलबम नहीं निकालता।
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आजकल सोशल साइट ने काम काफी आसान कर दिया है। इस कार्यक्रम के बारे में मैंने अपनी सोशल साइट पर अपडेट किया तो पुरी दुनिया को पता चला और मुझे काफी बधाइयां मिलीं। आजकल कंसर्ट में इतना व्यस्त हूं कि अपने लिए भी समय नहीं है।
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