बेंगलुरु के माउंट कार्मल कॉलेज प्रशासन द्वारा एक 17 वर्षीय अमृतधारी सिख छात्रा के दस्तार पहनकर कॉलेज आने पर पाबंदी लगाने पर पंजाब में तीखी प्रतिक्रिया हुई है। अनेक सिख संगठनों, एसजीपीसी के अलावा शिअद, कांग्रेस ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इस मामले में दखल देने की मांग की है।
एसजीपीसी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने अमृतधारी सिख लड़की को कॉलेज में प्रवेश के लिए पगड़ी उतारने के लिए कहे जाने पर कड़ा एतराज जताया है। एसजीपीसी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को पत्र लिखकर राज्य में सिखों की धार्मिक स्वतंत्रता को सुनिश्चित करने की मांग की है।
शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। उन्होंने साफ किया कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। दस्तार और पगड़ी सिखों की पोशाक का हिस्सा है। पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि मैंने हिजाब विवाद के समय ही आशंका जताई थी कि यह मामला सिखों की पगड़ी तक आ सकता है।
उनकी आशंका बेबुनियाद नहीं थी। कॉलेज छात्रा को अपनी दस्तार उतारने के लिए कहना निराशाजनक और निंदनीय है। निहंग सिंहों की सिरमौर संस्था शिरोमणि पंथ अकाली बुड्डा दल के प्रमुख जत्थेदार बाबा बलबीर सिंह अकाली 96 करोड़ी, जागो पार्टी के प्रधान मनजीत सिंह जीके ने कहा कि सिख इस भेदभाव को किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
उधर, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका व महासचिव जगदीप सिंह काहलों ने कहा कि पगड़ी बांधकर सिख लड़की को कक्षा में जाने से रोकना किसी भी प्रकार से उचित नहीं है। सिखों को हेलमेट पहनने से भी छूट मिली हुई है। हेलमेट के स्थान पर सिखों की पगड़ी को मान्यता दी गई है।