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गुड न्यूजः अब नहीं बनवाना पड़ेगा इनकम सर्टिफिकेट, बड़ा बदलाव

Wed, 29 Jun 2016 08:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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ऑफिस - फोटो : demo pics
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स्टूडेंट्स और उनके अभिभावकों के लिए गुड न्यूज। दाखिला करवाने के लिए अब इनकम सर्टिफिकेट नहीं बनवाना पड़ेगा। प्रशासन इनकम सर्टिफिकेट जारी करना बंद करने वाला है। इनकम सर्टिफिकेट की जगह सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म ही मान्य किया जाएगा। डीसी अजीत बालाजी जोशी से मंजूरी मिलते ही नई प्रक्रिया लागू हो जाएगी। कमाल तो इस बात का है कि नई प्रक्रिया लागू होने से पहले ही पुरानी को बंद कर दिया गया है। लोगों को गुमराह किया जा रहा है।
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अमर उजाला ने बुधवार को इस पूरे मामले की पड़ताल की। संपर्क सेंटर से फॉर्म लेकर इसे भरने के बाद सभी दस्तावेजों के साथ संपर्क सेंटर में ही जमा कराना होता है। इसके बाद फाइल मंजूरी के लिए तहसीलदार के पास पहुंचती है। इन दोनों जगह दो अलग चीजें हो रही हैं। संपर्क सेंटर पर इनकम सर्टिफिकेट आवेदन के फॉर्म तो दिए जा रहे हैं। लेकिन जब सर्टिफिकेट नहीं आने पर डीसी ऑफिस में ग्राउंड फ्लोर पर बनी रजिस्ट्रेशन विंडो पर पहुंचा जाता है तो सर्टिफिकेट बंद होने का जवाब मिलता है।

ऐसे में सवाल यह है कि जब सर्टिफिकेट जारी करना बंद कर दिया गया है तो संपर्क सेंटर से फॉर्म क्यों बेचे जा रहे हैं। महीने भर से लोगों को सर्टिफिकेट जारी नहीं किए जा रहे हैं। हजारों स्टूडेंट्स और उनके अभिभावक रोजाना चक्कर लगा रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत तो यह है कि इन दिनों एडमिशन का दौर चल रहा है। इसलिए स्टूडेंट्स को फीस कम करवाने या फिर स्कॉलरशिप के लिए इनकम सर्टिफिकेट शिक्षण संस्थानों में देना है। प्रशासन की इस अनदेखी में स्टूडेंट्स का भविष्य दाव पर लगा है। फीस में रियायत नहीं मिलने के कारण कई को अपना उच्च शिक्षा पाने का सपना टूटने का डर सता रहा है।
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झूठी आय संबंधी मामले आए थे सामने
पिछले साल एक व्यक्ति ने अपनी झूठी आय दिखाकर ईडब्ल्यूएस कोटे की सीट पर अपने बच्चे का दाखिला करवा लिया था। मामला सामने आने केबाद ग्राउंड लेवल पर निरीक्षण करने वाले अधिकारी को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर भी इसकी गाज गिरी थी। साथ ही उक्त व्यक्ति को भी जेल भेजा गया था। ऐसे ही मामलों से बचने केलिए प्रशासन सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म शुरू करने जा रहा है। इसके तहत जो भी जानकारी आवेदक देगा उसके झूठ या सच का वह खुद ही जिम्मेदार होगा। एक अधिकारी ने बताया कि कई लोगों की चंडीगढ़ से बाहर भी प्रापर्टी होती है वह इसकी जानकारी ही नहीं देते। इस तरह की चीजों को जांचना बड़ा मुश्किल है।
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