नवनिर्वाचित मेयर सरबजीत कौर पार्षद का भी चुनाव नहीं लड़ना चाहती थीं लेकिन किस्मत देखिए वह पहली बार में ही पार्षद चुनी गईं और मेयर का पद भी मिला। सरबजीत कौर चंडीगढ़ के सेक्टर-13 मनीमाजरा की रहने वाली हैं। सरबजीत कौर ने पहली बार नगर निगम चुनाव अपने वार्ड नंबर-6 से लड़ा और पार्षद के तौर पर जीतकर नगर निगम पहुंचीं। इस वार्ड की सीट महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा ने सरबजीत कौर को उम्मीदवार बनाया था। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने पहले इनकार कर दिया क्योंकि वह अपनी बेटी की सेवा करना चाहती थीं।
दरअसल, सरबजीत कौर की एक बेटी और बेटा है। बेटा इंदरप्रीत सिंह ऑस्ट्रेलिया में आर्किटेक्ट की पढ़ाई कर रहा है, जबकि बेटी गुरलीन कौर (19) मानसिक रूप से बीमार है, इसलिए वह अपनी बेटी की सेवा में लगी रहती हैं। पार्टी ने जब टिकट का ऑफर दिया तो उन्होंने यह हवाला देते हुए इनकार कर दिया लेकिन पार्टी के आदेश पर वह चुनाव लड़ीं।
मेयर के लिए प्रत्याशी बनाए जाने से पहले भी उन्होंने पार्टी के सामने यह बात दोहराई, पर आखिर में मेयर चुनी गईं। सरबजीत कौर के पति पूर्व पार्षद जगतार सिंह जग्गा ने बताया कि उन्होंने अपनी पत्नी को कहा कि वह चुनाव लड़ें। इतने साल उन्होंने बेटी की सेवा की है। अब पांच साल वह कर लेंगे।
कांग्रेस की ममता गिरि को हराया था
सरबजीत कौर ने वार्ड नंबर-6 में कांग्रेस उम्मीदवार ममता गिरि को हराया था। उनकी शादी वर्ष 2000 में भाजपा नेता जगतार सिंह जग्गा के साथ हुई थी। इनका मायका पंचकूला के रामगढ़ में है। सरबजीत कौर शादी के दौरान बीए सेकंड ईयर में पढ़ती थी। पढ़ाई के बीच में ही शादी हुई तो उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी। पति जगतार सिंह जग्गा पहले से ही राजनीति में हैं, जिस वजह से सरबजीत कौर भी सामाजिक कार्यों में रुचि लेने लगीं। जगतार जग्गा इससे पहले नगर निगम में भाजपा पार्षद के तौर पर चुनाव जीत चुके हैं। वह सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर भी रहे हैं।