श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप की बेअदबी के मामले में राम रहीम द्वारा प्रोडक्शन वारंट के खिलाफ दाखिल अपील पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में एसआईटी ने कहा कि राम रहीम से जेल में पूछताछ की गई। मगर उसने जांच में सहयोग नहीं किया। वह सवालों को टाल रहा था और सही जवाब नहीं दे रहा था। ऐसे में अब उससे दोबारा पूछताछ जरूरी है।
गांव बुर्ज जवाहर सिंह वाला के गुरुद्वारा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप की चोरी और बाद में इसकी बेअदबी के मामले में जांच कर रही एसआईटी ने इस मामले में राम रहीम से पूछताछ की अनुमति मांगी थी। एसआईटी के निवेदन पर फरीदकोट की ट्रायल कोर्ट ने डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को प्रोडक्शन वारंट पर लाने की अनुमति देते हुए उसे 29 अक्तूबर को न्यायालय में पेश करने का आदेश दिया था। राम रहीम ने इस मामले में हाईकोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की थीं। एक याचिका में अग्रिम जमानत की मांग की गई थी तो दूसरी में प्रोडक्शन वारंट को चुनौती दी गई थी।
हाईकोर्ट ने राम रहीम को प्रोक्शन वारंट पर ले जाने के आदेश को रोक दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि यदि पंजाब पुलिस की एसआईटी राम रहीम से पूछताछ करना चाहती है तो वह रोहतक की सुनारिया जेल में भी कर सकती है। इसके बाद पुलिस ने वहां पर पूछताछ की और अब बताया है कि राम रहीम जांच में सहयोग नहीं कर रहा है। ऐसे में उससे दोबारा पूछताछ जरूरी है। एसआईटी ने कहा कि इस मामले में गवाहों के बयान डेरे से जुड़ रहे हैं। राम रहीम के भक्त उससे पूछे बगैर कुछ काम नहीं करते हैं ऐसे में फरीदकोट के ट्रायल कोर्ट ने रिमांड का सही आदेश दिया था। ऐसे में राम रहीम की याचिका को खारिज किया जाए।
प्रोडक्शन वारंट आगामी चुनाव में सत्तादल की जीत का दांव
राम रहीम ने अपनी याचिका में कहा कि बेअदबी मामले में पहले जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई इसमें कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल कर चुकी थी। इसके बाद सत्ता बदली तो केस सीबीआई से वापस लेकर एसआईटी को सौंप दिया गया। एसआईटी ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए इस मामले में याची का नाम घसीटा। अब जब पंजाब में विधानसभा चुनाव सर पर हैं तो सत्ता दल के इशारे में याची के प्रोडक्शन वारंट की मांग एसआईटी ने कर दी है जो जांच नहीं सत्ताधारी दल की जीत का दांव है।