रोष व्यक्त करते परिजन और मृतक (इनसेट)।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
चंडीगढ़ के मनीमाजरा के सिविल अस्पताल में इलाज के दौरान एक 16 वर्षीय किशोर की मौत हो गई। इस पर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि किशोर की हालत गंभीर होते हुए भी डॉक्टरों ने इलाज सही समय पर नहीं किया। इसमें लापरवाही बरती गई। समय पर इलाज मिलता तो किशोर की जान बचाई जा सकती थी। हंगामे के बाद पहुंची पुलिस ने परिजनों से शिकायत पत्र लेने के बाद मामला शांत करवाया दिया। पोस्टमार्टम कराने के लिए कहा गया, लेकिन परिजनों ने मना कर दिया।
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स्वास्थ्य निदेशक बोलीं, नहीं मिली शिकायत
उधर, अस्पताल प्रबंधन इस संबंध में बात करने को तैयार नहीं है। चंडीगढ़ की स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन का कहना है कि उनके पास इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आई है। मृतक के पिता कुलदीप सिंह ने बताया कि वह सेक्टर-17 डीसी ऑफिस के बाहर टाइपिस्ट का काम करते हैं। अपने परिवार के साथ रामदरबार फेज-2 के मकान नंबर-2615 में रहते हैं। उनके दो पुत्र नवदीप और वंश हैं। दो दिन पहले नवदीप को हल्का बुखार आया था। बुधवार की रात उसे उल्टियां आईं तो उसे तड़के चार बजे मनीमाजरा सिविल अस्पताल में लेकर पहुंचे। दिन में 11 बजे उसकी मौत हो गई।
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एक इंजेक्शन लगाया, इसके बाद नहीं की संभाल
मृतक के पिता कुलदीप सिंह ने आरोप लगाया कि अस्पताल में डॉक्टर और दो नर्सों ने इलाज में लापरवाही बरती। सुबह एक इंजेक्शन लगाने के बाद डॉक्टरों ने न कोई दवाई दी और न अन्य इलाज किया। हालांकि नवदीप बार-बार यह कहता रहा कि उसका दम घुट रहा है और बहुत घबराहट हो रही है, परंतु दोनों नर्सों ने कहा कि इसके प्लेटलेट्स कम होकर 43 हजार रह गए हैं, इसलिए घबराहट हो रही है। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अस्पताल के चिकित्सकों से कहा था कि यदि मामला गंभीर है, तो उन्हें पीजीआई रेफर कर दें या फिर वह निजी अस्पताल ले जाएंगे, लेकिन उन्होंने मामला गंभीर नहीं बताया।