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अदालती फेर में उलझ सकती है कंप्यूटर टीचरों की भर्ती

Sat, 26 Mar 2016 12:00 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नौकरी - फोटो : job
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हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कंप्यूटर टीचरों की भर्ती का मामला अदालतों के फेर में उलझ सकता है। शिक्षा विभाग ने पिछले साल नौकरी से हटाए गए 2600 कंप्यूटर टीचरों को 31 मार्च, 2016 तक की अवधि के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर रखा था।
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उस समय पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से विभाग को निर्देश मिला था कि 31 मार्च तक विभाग कंप्यूटर टीचरों की नियमित भर्ती प्रक्त्रिस्या पूरी करे। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वालों को नौकरी से हटाकर नई भर्ती भी कॉन्ट्रैक्ट पर ही किए जाने को भी गलत ठहराया था।

ऐसे में शिक्षा विभाग की ओर से 3336 कंप्यूटर शिक्षकों की कॉन्ट्रैक्ट आधार पर नई भर्ती करने का फैसला खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। इस समय कार्यरत कंप्यूटर टीचरों ने विभाग के फैसले के खिलाफ सड़क पर उतरने का ऐलान करने के साथ ही नई भर्ती को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर 30 मार्च को सुनवाई होगी।
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कंप्यूटर शिक्षक संघ के प्रदेश प्रधान बलराम धीमान का कहना है कि शिक्षा विभाग गलत तरीके अपनाकर मौजूदा कंप्यूटर शिक्षकों को न केवल स्कूल से बाहर करना चाहता है, बल्कि उन्हें नई भर्ती में आवेदन का मौका भी नहीं देना चाहता। विभाग ने कंप्यूटर शिक्षकों की नई भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता भी कम कर दी है।

नई भर्ती के लिए आवेदक का बीसीए, बीएससी या अन्य स्नातक डिग्री धारी होना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में जो कंप्यूटर टीचर कॉन्ट्रैक्ट पर कार्यरत हैं उन सभी की शैक्षिक योग्यता बीटेक, एमटेक और एमसीए है। इस तरह अधिक योग्यता वाले मौजूदा कॉन्ट्रैक्ट टीचर नई भर्ती में आवेदन करने के पात्र नहीं रह गए हैं।

धीमान ने कहा कि पिछले साल कंप्यूटर टीचरों को नौकरी पर रखने वाले ठेकेदार से विभाग का कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने के बाद टीचरों को नौकरी बहाली के लिए छह महीने धरना देना पड़ा था। इस बार कंप्यूटर टीचर सरकार के अन्याय का कड़ा विरोध करेंगे।

कांट्रैक्ट कर्मियों को हटाकर नई कांट्रैक्ट भरती गलत
प्रधान बलराम धीमान और संघ के प्रवक्ता सुरेश नैन का कहना है कि पिछले वर्ष सरकार ने हमें 31 मार्च तक अनुबंध के आधार पर नौकरी पर रखा था। तब विभाग ने कंप्यूटर शिक्षकों की 31 मार्च तक नियमित भर्ती करने की बात भी कही थी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही यह व्यवस्था दे चुकी है कि सरकार कांट्रैक्ट पर भर्ती नहीं कर सकती क्योंकि इस तरीके से कर्मचारियों का शोषण होता है।

वहीं, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट भी यह स्पष्ट कर चुकी है कि अनुबंध पर कार्यरत कर्मचारियों को हटाकर नए कर्मचारियों की भरती अनुबंध आधार पर नहीं की जा सकती। धीमान ने बताया कि पिछले वर्ष भी सरकार ने इस तरह का प्रयास किया था जिसे कंम्पयूटर टीचरों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उस समय भी माननीय उच्च न्यायालय ने टीचरों के ह? में फैसला दिया था।
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