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पाठ्यक्रम में योग को अनिवार्य विषय बनवाएंगे: : आचार्य बालकृष्ण

Fri, 25 Mar 2016 12:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिल्लूखेड़ा(जींद)
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कार्यक्रम में मंच पर मौजूद आचार्य बालकृष्ण व अन्य अतिथिगण। - फोटो : amarujala
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पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के महामंत्री आयुर्वेद मनीषी वैद्यराज आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि शिक्षकों की कमी के चलते आज वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार नहीं हो पा रहा है। इसके चलते पाश्चात्य संस्कृति के प्रचलन को बढ़ावा मिल रहा है। आचार्य ने कहा कि वैदिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए आचार्य कुलम द्वारा नई पद्धति तैयार की गई है। इस पद्धति के तहत 500 नए विद्यालय खोले जाएंगे और इन विद्यालयों में वैद्धिक संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए नए शिक्षक तैयार किए जाएंगे।
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आचार्य बालकृष्ण बुधवार को होली महोत्सव पर भिड़ताना गांव में कन्या गुरुकुल के उद्घाटन के लिए पहुंचे थे। इस अवसर पर उनके साथ कालवा गुरुकुल के आचार्य राजेंद्र, आचार्य आत्मप्रकाश, गोरक्षा दल के प्रदेशाध्यक्ष योगेंद्र आर्य, आचार्य समुद्धा, सतीश राज देशवाल, सुनील आर्य सहित काफी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर गांव में जगह-जगह हवन भी किए गए और वैद्धिक पद्धति से होली का पर्व मनाया गया।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि योग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए योग को पाठ्यक्रम का अनिवार्य विषय बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार के साथ बातचीत चल रही है और बहुत जल्द सरकार की तरफ से इस दिशा में सकारात्मक कदम बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
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उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से पाश्चात्य संस्कृति को काफी बढ़ावा मिला है और समाज में नैतिक मूल्यों में काफी गिरावट आई है। इसका कारण यह रहा है कि वैद्धिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए गुरुकुलों में पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं हैं। संसाधनों के अभाव के चलते पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव को खत्म करने के लिए थोड़ा समय लगेगा।

आचार्य ने कहा कि लड़कियों की शिक्षा की तरफ भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए कन्या गुरुकुलों की स्थापना की जा रही है। क्योंकि बेटियों को शिक्षित किए बिना समाज से कुरीतियों को खत्म करना संभव नहीं है। अगर बेटियां शिक्षित हो जाएंगी तो बहुत सी कुरीतियां तो स्वयं ही खत्म हो जाएंगी। क्योंकि कई प्रकार की कुरीतियां ऐसी हैं जो जागरूकता के अभाव में बढ़ रही हैं। आचार्य राजेंद्र तथा आत्मप्रकाश ने लोगों से वैद्धिक पद्धति से होली का पर्व मनाने का आह्वान किया।
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