इस दौरान मेयर कार्यालय में भाजपा की बैठक जारी रही। बैठक में प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, संगठन मंत्री दिनेश कुमार और प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के अलावा सभी पार्षद भी मौजूद रहे। वहीं, कमरे के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी थी। तभी अचानक चंद्रावती शुक्ला अपने पति गोपाल शुक्ला के साथ बाहर आ गईं। पार्षद गुरप्रीत सिंह ने उन्हें रोकने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं मानीं। वहीं, भाजपा पार्षद भरत कुमार भी बिफर गए। पार्टी पदाधिकारी मामले को शांत करवाने का प्रयास करते रहे लेकिन पार्षदों ने किसी की बात नहीं सुनी।
चीफ इंजीनियर कार्यालय में हुई बहस, फिर मेयर दफ्तर पहुंचा मामला
एक ओर भाजपा के उम्मीदवार नामांकन पत्र भर रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बागी पार्षद चंद्रावती शुक्ला व उनके पति को लेकर कांग्रेस पार्षद सतीश कैंथ भी वहां पहुंच गए और मेयर पद के लिए आजाद उम्मीदवार के तौर पर चंद्रावती शुक्ला का नामांकन पत्र भरवा दिया। इसी दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद, पार्षद कंवरजीत राणा सहित अन्य पदाधिकारी उन्हें रोकने पहुंच गए। इस दौरान काफी गर्मागर्मी होने लगी। आवाज सुनकर लोग कमरे में पहुंच गए। इसके बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने सभी को मेयर के कमरे में चलने को कहा लेकिन चंद्रावती शुक्ला सचिव के पास नामांकन पत्र जमा करने चली गईं।
पिछले साल भी चंद्रावती शुक्ला ने मेयर प्रत्याशी न बनाए जाने पर बगावत कर दी थी। तब भी कैंथ ने ही उनका नामांकन पत्र भरवाने का प्रयास किया था लेकिन तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और अरुण सूद किसी तरह चंद्रावती शुक्ला और उनके पति को मेयर के कमरे में ले गए। इस दौरान वहां भाजपा पार्षद और कांग्रेस की महिला कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। हालांकि बाद में मामला शांत हो गया। उसके बाद भाजपा में कमेटियों का गठन हुआ तब भी पूर्वांचल के नेताओं को जगह न देने का आरोप लगा और बवाल शुरू हो गया। हालांकि किसी तरह तब भी मामले को शांत कराया गया था।
'गद्दारों' को दे दिया टिकट : भरत कुमार
चंद्रावती शुक्ला का मामला शांत हुआ नहीं था कि एक और भाजपा पार्षद भरत कुमार ने भी बगावत शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि मैंने भाजपा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही आरोप लगाया कि भाजपा ने गद्दारों को टिकट दे दिया है। ऐसे लोग जो क्रॉस वोटिंग करवाते हैं। मैंने पार्टी के लिए हमेशा काम किया लेकिन पार्टी ने उसे दरकिनार कर दिया।
कार्यकर्ता बस दरी बिछाने के लिए है : गोपाल शुक्ला
चंद्रावती शुक्ला के पति गोपाल शुक्ला भी गुस्से में नजर आए। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि भीड़ जुटाने के लिए पूर्वांचल के नेता आगे रहते हैं, लेकिन जब जिम्मेदारी देने की बात आती है तो इन कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया जाता है। जब भी कोई सभा होती है तो मेहनती भाजपा कार्यकर्ता केवल दरी बिछाने का काम करते हैं लेकिन जब पद देने की बात आती है तो उन्हें हर बार आश्वासन दे दिया जाता है। इससे कार्यकर्ता का मनोबल टूटता है।
भाजपा में भले ही बगावत हो रही हो लेकिन जीत के आंकड़े को छूने के लिए जरूरी संख्या बल उसके पास मौजूद हैं। अभी भाजपा के पास कुल 21 वोट हैं। वहीं कांग्रेस के पांच और अकाली दल का एक वोट है। बहुमत के लिए भाजपा को 13 वोट चाहिए इसलिए भाजपा को हार का खतरा नहीं है, लेकिन साख बचाने के लिए क्रॉस वोटिंग रोकना जरूरी है।
बबला का नामांकन रद्द करने की मांग करेंगे : अरुण सूद
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने कहा कि देवेंद्र सिंह बबला कांग्रेस से मेयर पद के उम्मीदवार हैं। इसके बावजूद वह चंद्रावती शुक्ला के नामांकन के दौरान प्रस्तावक बने हैं। कानूनी रूप से यह गलत है। भाजपा बबला का नामांकन रद्द करने की मांग करेगी।
सभी को मना लेंगे, पार्टी एकजुट : रविकांत शर्मा
भाजपा से मेयर पद के उम्मीदवार रविकांत शर्मा ने कहा कि पार्टी एकजुट है। जो लोग रूठे हैं, उन्हें भी मना लेंगे। कई बार मतभेद हो जाते हैं लेकिन मनभेद नहीं है। वोटिंग वाले दिन पूरे 21 वोट भाजपा के हिस्से में आएंगे।
संगठन ने जो तय किया, वही मान्य है : शक्ति प्रकाश देवशाली
पार्षद शक्ति प्रकाश देवशाली ने कहा कि संगठन ने जो तय किया है, उन्हें वह मान्य है। टिकट मिलना जरूरी नहीं। पार्टी के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया है। भविष्य में जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसे भी पूरी कर्मठता से निभाएंगे।
हर बार आश्वासन से काम नहीं चलता : चंद्रावती शुक्ला
भाजपा पार्षद चंद्रावती शुक्ला ने कहा कि हमने पार्टी के लिए जी जान से काम किया है। पार्टी को जहां जरूरत थी, हम खड़े रहे। बावजूद इसके अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। आखिर कर्मठ कार्यकर्ता को जिम्मेदारी क्यों नहीं मिलती।