आरएसएस ने स्थानीय इकाइयों से दशहरे पर परेड से बचने और स्थानीय स्तर पर छोटे कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। स्वयंसेवकों को ये निर्देश लिखित में नहीं मौखिक रूप में दिए गए हैं। मौखिक रूप से सूबे में सभी स्वयंसेवकों को इस फैसले की जानकारी दी गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) इस बार पंजाब में दशहरे पर वार्षिक वर्दी परेड नहीं करेगा। आरएसएस ने यह फैसला किसान आंदोलन के चलते लिया है। दशकों से आरएसएस यह वार्षिक वर्दी परेड प्रदेश में करता रहा है। इसके जरिये स्वयंसेवी लाठी के साथ अपनी ताकत का प्रदर्शन करते रहे हैं। कभी-कभी हथियारों के साथ परेड भी की जाती है।
सूत्रों के मुताबिक आरएसएस ने स्थानीय इकाइयों से दशहरे पर परेड से बचने और स्थानीय स्तर पर छोटे कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। स्वयंसेवकों को ये निर्देश लिखित में नहीं मौखिक रूप में दिए गए हैं। मौखिक रूप से सूबे में सभी स्वयंसेवकों को इस फैसले की जानकारी दी गई है। आरएसएस की ओर से परेड रद्द करने का स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि पंजाब में कृषि कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन के कारण यह वार्षिक वर्दी परेड रद्द की गई है। सभी स्वयंसेवकों को सलाह दी गई है कि वह स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे कार्यक्रमों का आयोजन करें।
मोदी-शाह का पुतला नहीं फूंकेंगे किसान
कृषि कानूनों के विरोध में पंजाब की 32 किसान जत्थेबंदियों ने दशहरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का पुतला दहन कार्यक्रम रद्द कर दिया है। इसके पीछे की वजह किसान नेताओं ने किसी धर्म से संबंधित त्योहार को खराब नहीं करना बताया है। किसान अपना यह विरोध कब करेंगे, इसको लेकर किसान नेताओं की तरफ से कोई एलान नहीं किया गया है।