क्या है पर्ल्स ग्रुप घोटाला
पर्ल्स एग्रो कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) जिसे पर्ल्स ग्रुप ग्रुप के नाम से भी जाना जाता है। इस ग्रुप ने पंजाब समेत देशभर में पांच करोड़ आम लोगों से खेती और रियल एस्टेट जैसे कारोबार में पैसे लगाने के नाम पर 60,000 करोड़ रुपये की राशि जुटाई। कंपनी ने यह निवेश 18 वर्षों के दौरान गैरकानूनी तरीके से हासिल किया। जब लौटाने की बारी आई तो कंपनी पीछे हटने लगी। तब इस मामले में सेबी ने दखल दिया था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
निवेशक लंबे समय से अपना पैसा वापस पाने का इंतजार कर रहे हैं। मामले की सीबीआई जांच भी जारी है और सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए जस्टिस आरएम लोढ़ा की अगुवाई में कमेटी का गठन किया। कमेटी के सामने डेढ़ करोड़ लोगों ने रिफंड क्लेम भी पेश किया। 2016 में गठित जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने पीएसीएल और उससे जुड़ी संस्थाओं की संपत्तियों को बेचकर 878.20 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए हैं।
कमेटी ने जिन संपत्तियों से रिकवरी की कार्रवाई की है, उनमें ऑस्ट्रेलिया स्थित पर्ल्स इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की कंपनियां भी शामिल हैं। उससे कमेटी ने 369.20 करोड़ की रिकवरी की है। इसके अलावा 308.04 करोड़ सरकार ने पर्ल्स ग्रुप और उसकी सहयोगी कंपनियों के खातों को फ्रीज कर जुटाए।
इनमें कंपनी के फिक्स्ड डिपोजिट से 98.45 करोड़ रुपये मिले हैं। कंपनी के 75 लग्जरी वाहनों को बेचकर 15.62 करोड़ रुपये की रिकवरी की गई। वहीं, कंपनी की संपत्ति से जुड़े छह दस्तावेजों से 69 लाख रुपये मिले हैं। अब तक कंपनी के मालिक समेत 117 अधिकारी और हिस्सेदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं और कंपनी की सभी संपत्तियों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है।