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Punjab: आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का निधन, चल रहे थे बीमार

Sat, 27 Jan 2024 09:58 PM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़

सार

आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का निधन शनिवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे।
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पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय नागरिक उड़्डयन मंत्री हरमोहन धवन का शनिवार देर शाम मोहाली के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और कुछ समय से बीमार चल रहे थे। धवन ने अंतिम समय तक आम लोगों के लिए संघर्ष किया। जनता के लिए वह कई बार जेल भी गए थे। उनके निधन से शहर में शोक की लहर दौड़ गई।

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हरमोहन धवन का जन्म 14 जुलाई 1940 को फतेहजंग जिला कैंबलपुर (अब पाकिस्तान में) हुआ था। भारत-पाक बंटवारे के बाद वह अपने परिवार के साथ अंबाला छावनी आ गए थे। वहीं से उन्होंने मैट्रिक और इंटर की परीक्षा पास की थी। वर्ष 1989 में धवन चंडीगढ़ के सांसद चुने गए थे। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की सरकार में वह नागरिक उड्डयन मंत्री रहे।

वह अपने पीछे पत्नी सतिंदर धवन और दो बेटों व बेटी सहित भरे-पूरे परिवार को छोड़ गए हैं। धवन ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ से वनस्पति विज्ञान से बीएससी (ऑनर्स) किया था। उन्होंने वर्ष 1977 में राजनीति में प्रवेश किया और 1981 में चंडीगढ़ जनता पार्टी के अध्यक्ष बने। वह कांग्रेस, बसपा और भाजपा में भी रहे। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के प्रदर्शन से प्रभावित होकर धवन बाद में आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए थे। 

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सांसद रहते हुए उन्होंने शहर के विकास में विशेष योगदान दिया। कॉलोनी के लोगों को मालिकाना हक दिलाया। रेहड़ी-फड़ी वालों को पक्के बूथ दिलवाए। कॉलोनी और गांव के लोगों के लिए हमेशा संघर्ष करते रहे। सेक्टर-32 का जीएमसीएच हरमोहन धवन के प्रयासों से ही बन पाया। उनके निधन पर शहर के कई नेताओं समेत अन्य लोगों ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

बंटवारे में पाकिस्तान में छूट गया घर-बार, अंबाला में सोने का कड़ा बेच शुरू किया था व्यापार

बात 1947 की है। बंटवारे में पाकिस्तान में घर-बार छूट गया। उस वक्त हरमोहन धवन महज छह-सात साल के थे। बंटबारे के दौरान पाकिस्तान में चारों तरफ लाशें बिखरी पड़ी थीं। वे अपने पिता और परिवार के साथ पाकिस्तान से अंबाला छावनी आ गए थे। अंबाला छावनी में उनके परिवार ने काफी संघर्ष किया।

इस दौरान परिवार के पोषण और कारोबार शुरू करने के लिए उन्हें अपना सोने का कड़ा बेचना पड़ा। कड़ा बेचकर मिले पैसे से चीनी खरीदकर कारोबार शुरू किया। धीरे-धीरे कारोबार चल पड़ा और जिंदगी भी ढर्रे पर चल पड़ी। धवन का कहना था कि बंटवारे का बहुत दुख झेला। उनके पास कोई आता है तो लगता है मेरा ही दुख है। यह सोच कर वे जरूरतमंदों की सेवा में जुट जाते थे। 

धवन का कहना था कि आजादी बहुत कुर्बानियों के बाद मिली है। सभी ने बहुत दुख झेले हैं। इसमें किसी ने बेटा, भाई, पति, पत्नी और अपने नन्हे-मुन्ने बच्चों को खोया। उनको भी याद करना चाहिए। हरमोहन धवन शहर के लोगों के लिए संघर्ष करते हुए कई बार जेल भी गए। अंतिम समय तक सभी के साथ सौम्य व्यवहार रखा। उनका स्वाभिमान सर्वोपरि था, इससे कभी समझौता नहीं किया। उनके पास अमीर और गरीब सभी एक साथ बैठते थे। 

रेल इंजन से पानी पीते वक्त जल गया था मुंह

बंटवारे के दौरान दंगे में बिताए समय को बताकर वह सिहर उठते थे। बंटवारे का दर्द बयां करते उन्होंने बताया था कि पाकिस्तान में घर छोड़ने के बाद बाघा बॉर्डर पर उन्हें प्यास लगी तो पानी भी नहीं था। रेल के इंजन से निकलने वाले पानी को पीने की कोशिश की तो ड्राइवर ने प्रेशर से पानी फेंका। उससे उनका मुंह जल गया। वह तीन दिनों तक भूखे रहे।
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