पंजाब की जेलों में कैदियों के पास से मोबाइल, नशा और अन्य अवैध वस्तुएं मिलने का सिलसिला जारी है लेकिन खास बात यह है कि सूबे की सभी जेलों में कैदियों की भारी भीड़ के बीच केवल 5123 सजायाफ्ता कैदी हैं, जिन्हें नियंत्रण में रख पाना जेल विभाग के लिए मुश्किल काम हो गया है।
जानकारी के अनुसार पंजाब की जेलों में इस समय 26164 कैदी बंद हैं। इनमें से 5123 तो सजायाफ्ता हैं जबकि 21007 कैदी विचाराधीन कैदियों की श्रेणी में आते हैं। यानी अभी उनकी सजा तय नहीं हुई है। इन विचाराधीन कैदियों में कोई भी कुख्यात या दुर्दांत कैदी नहीं है। ज्यादातर ऐसे लोग हैं जो नशेड़ी, स्नैचर या छोटे-मोटे अपराधों में गिरफ्तारी के बाद अपनी सजा का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर 5123 कैदियों में हत्या जैसे संगीन अपराधों वाले लोगों के साथ ही कुख्यात गैंगस्टर भी हैं, जिनके पास आए दिन जेल अधिकारियों को मोबाइल, नशा आदि बरामद होता रहता है।
हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जेलों में गैंगस्टरों व अन्य कैदियों को मिल रही वीआईपी आवभगत को खत्म करने का एलान करते हुए उनके लिए बनाए गए स्पेशल सेल जेल प्रशासन के अधीन लाने का आदेश जारी किया था। यह स्पेशल सेल पिछली सरकार के समय बनाए गए थे, जिनमें बंद गैंगस्टरों को हर तरह की आरामदायक सुविधाएं, खेलने का सामान आदि मुहैया कराया गया था। इसके अलावा इन सेल में ड्यूटी पर तैनात जेलकर्मियों को मास्क मुहैया कराए गए थे, ताकि गैंगस्टरों को जेल स्टाफ की पहचान न हो सके और बाहर निकलकर वह उन्हें नुकसान न पहुंचा सकें।
पिछली सरकार के समय ही जेलों में बाहर से सामान भीतर फेंकने की घटनाएं रोकने के लिए बाहरी दीवारों को ऊंचा उठाने और जेलों में लगे जैमरों को नई तकनीक से जोड़ने का भी फैसला हुआ, लेकिन इन पर अब तक काम नहीं हो सका। जेलों में लगे जैमर 2जी सिग्नल ही रोक सकते हैं जबकि अब कैदियों के पास 4जी और 5जी सिम वाले मोबाइल पहुंच चुके हैं।
इस संबंध में जेल मंत्री हरजोत सिंह बैंस का कहना है कि जेलों को कैदियों के लिए सुधार गृह बनाया जा रहा है और उसके अनुसार ही योजना भी बनाई जा रही है। कैदियों के कब्जे से मोबाइल और नशे जैसी वस्तुएं मिलने के मामले में अब संबंधित जेल प्रशासन को जिम्मेदार बनाया गया है।