पंजाब की सत्ता पर दस साल तक राज करने वाला शिरोमणि अकाली दल लगातार अपना वोट प्रतिशत खोता जा रहा है। 2017 से लगातार हार का सिलसिला जारी है और 2024 में तो शिरोमणि अकाली दल की हालत इस कद्र खराब हो चुकी है कि पार्टी को दो साल पहले पड़ी वोट भी हासिल नहीं हो पाई है।
महानगर के अकाली दल के प्रत्याशी रंजीत सिंह ढिल्लों की जमानत तक जब्त हो गई। शिअद का ग्राफ लगातार गिरता जा रहा है। पहले अकाली दल को शहरी इलाकों से मार पड़ती थी। अब ग्रामीण इलाकों में भी अकाली दल को मार पड़ने लगी है।
महानगर की बात की जाए तो अकाली दल के प्रत्याशी घोषित विपन सूद काका ने पहले चुनाव लड़ने से मना करदिया और उसके बाद वह अकाली दल को अलविदा कह दोबारा से भाजपा में चले गए और उसके बाद गुरप्रीत सिंह बब्बल भी अकाली दल को छोड़ कर आप में चले गए।
चुनाव के बाद तो विरोध ओर भी बढ़ गया और अकाली दल के मालवा इलाके से इकलौते विधायक मनप्रीत सिंह अयाली ने सीधे तौर झूंदा कमेटी की रिपोर्ट लागू करने की मांग कर डाली और कह दिया कि तब तक वह पार्टी की गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे।