जेल में लॉरेंस बिश्नोई के इंटरव्यू के आठ महीने बाद भी जांच पूरी न होने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साफ कहा कि हम इस जांच और जांच में देरी के लिए दिए गए स्पष्टीकरण से बिलकुल संतुष्ट नहीं हैं। मंगलवार को पंजाब सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने 14 दिसंबर को अगली सुनवाई पर एडीजी जेल को हाजिर रहने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जेल परिसर में मोबाइल फोन के इस्तेमाल पर रोक के लिए उठाए गए कदमों का ब्योरा सौंपने का हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन को आदेश जारी किया है।
हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को सुझाव दिया कि कुख्यात कैदियों की निगरानी के लिए उनके बैरक के सामने सीसीटीवी कैमरा लगाने का विकल्प अपनाया जा सकता है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जेल से भी गैंगस्टरों का मोबाइल फोन इस्तेमाल करना और फिरौती के लिए कॉल करना गंभीर विषय है। इसको रोकने के लिए तुरंत प्रभावी कदम उठाना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही इस प्रकार के कैदियों का नेटवर्क तोड़ने की दिशा में भी काम करने की जरूरत है ताकि ये जेल से अपने संदेश बाहर न भेज सकें। सरकार ने अगर इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया तो हम आदेश जारी करने को मजबूर हो जाएंगे।
याचिका में अर्जी दाखिल करते हुए एडवोकेट गौरव भइया ने मामले में उन्हें याचिका में पक्ष बनाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने अर्जी में इंटरव्यू के लिए दोषियों की जिम्मेदारी तय करने की अपील की है। हाईकोर्ट ने उनकी अर्जी पर सुनवाई करते हुए अब पंजाब सरकार सहित अन्य को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
मामला संगरूर की जेल से जुड़ा है, जहां पर पॉक्सो एक्ट में विचाराधीन कैदी द्वारा पीड़ित को मोबाइल से जेल का वीडियो भेजने की अदालत को जानकारी दी गई थी। सिंगल बेंच के समक्ष कैदी की नियमित जमानत याचिका विचाराधीन थी। जेल में कैदियों के मोबाइल इस्तेमाल को बेहद गंभीर मामला बताते हुए सिंगल बेंच ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के तौर पर सुनवाई आरंभ की तो इस दौरान लॉरेंस बिश्नोई के जेल से हुए इंटरव्यू का मुद्दा उठा और हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब तलब कर लिया था।