पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि एनडीपीएस के मामले में जांच पूरी करने की अवधि को अदालत यूं ही नहीं बढ़ा सकती। इसके लिए पब्लिक प्रोसीक्यूटर की रिपोर्ट अनिवार्य है जिसमें जांच की स्थिति और अवधि को बढ़ाने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए।
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याचिका दाखिल करते हुए चंद्रप्रकाश ने सोनीपत जिला अदालत द्वारा उसकी डिफाल्ट जमानत याचिका रद्द करने के आदेश को चुनौती दी थी। याची ने बताया था कि उसके खिलाफ 1 नवंबर 2022 को एनडीपीएस एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में पुलिस को 1 मई 2023 तक जांच पूरी कर कोर्ट में रिपोर्ट सौंपनी थी। पुलिस ने जो रिपोर्ट सौंपी, उसके साथ एफएसएल की रिपोर्ट को संलग्न नहीं किया। ऐसे में याची ने 180 दिन के भीतर जांच पूरी न होने की दलील देते हुए डिफाल्ट जमानत की मांग की थी।
ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि पुलिस ने जांच रिपोर्ट सौंप दी है और एफएसएल रिपोर्ट अभी प्राप्त नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए गलती की है। कोर्ट ने कहा कि अदालत यूं ही जांच पूरी करने का समय नहीं बढ़ा सकती है। कोर्ट को अधिकार है कि वह इस अवधि को 180 दिन से बढ़ा कर एक साल कर दे लेकिन इसके लिए पब्लिक प्रोसीक्यूटर की रिपोर्ट अनिवार्य है। इस रिपोर्ट के अभाव में जांच पूरी करने की अवधि नहीं बढ़ाई जा सकती है। इसके साथ ही एफएसएल रिपोर्ट चालान का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसके बिना चालान को अधूरा माना जाता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने सोनीपत की ट्रायल कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए याची को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है।