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Highcourt: पशुओं पर क्रूरता रोकने के लिए प्रावधानों का पालन न करने पर हाईकोर्ट सख्त, पंजाब-हरियाणा को आदेश

Sat, 18 Feb 2023 04:32 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार की ओर से आधिकारिक राजपत्र में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम नियम 2001 अधिसूचित होने के दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका सही पालन नहीं किया जा रहा है।
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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विस्तार
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पशु चिकित्सालयों व आश्रय स्थलों में मूलभूत सुविधाओं की कमी पर पंजाब व हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि यदि 15 दिन के भीतर प्रावधान के अनुरूप सुविधाएं नहीं दी गई तो दोनों राज्य मोटे जुर्माने के लिए तैयार रहें। कोर्ट ने सभी जिलों में भेजे गए कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट देखने के बाद वहां की व्यवस्था पर असंतुष्टि भी जताई।
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मोगली एनिमल वेलफेयर सोसाइटी चंडीगढ़ ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि पशु क्रूरता की रोकथाम नियम के अनुसार अस्पताल और पशु आश्रय के निर्माण के उद्देश्य से जिला सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रूएलिटी टू एनिमल (एसपीसीए) को पर्याप्त भूमि और अन्य सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है। पशुओं के लिए अस्पताल व आश्रय के प्रभावी संचालन और रखरखाव के लिए एक पूर्णकालिक पशु चिकित्सक और अन्य कर्मचारियों को उपलब्ध कराना भी आवश्यक है। 

हाईकोर्ट को बताया गया कि भारत सरकार की ओर से आधिकारिक राजपत्र में पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम नियम 2001 अधिसूचित होने के दो दशक बीत जाने के बावजूद इसका सही पालन नहीं किया जा रहा है। याचिका में नियमों को सही ढंग से लागू करने की मांग की गई है। 
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हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर इस मामले में हरियाणा के सभी जिलों को कवर करने के लिए 10 वकीलों और पंजाब के जिलों को कवर करने के लिए 12 वकीलों को लोकल कमिश्नर के रूप में नियुक्त करते हुए कहा था कि यह लोग फील्ड में जाकर देखें व दोनों राज्यों में जमीनी स्तर पर उपलब्ध सुविधाओं की तस्वीरें लें। लोकल कमिश्नर रिपोर्ट में प्रत्येक जिले में एसपीसीए के लिए उपयोग की जाने वाली भूमि/परिसर का कुल क्षेत्र बताएं और यह भी बताया जाए कि वहां कितने कर्मचारी तैनात हैं और उनकी योग्यता क्या है। सोसायटी द्वारा नियुक्त किए गए प्रशासक यदि कोई हो तो उसका भी विवरण दिया जाए। एसपीसीए में उपलब्ध एंबुलेंस और दवाओं/उपकरण सहित उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का विवरण भी देने का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। सभी कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद याची ने एक चार्ट तैयार किया और सभी केंद्रों की खामियां उजागर कीं। कोर्ट ने अब दोनों सरकारों को 15 दिन की मोहलत देते हुए तय प्रावधानों का पालन कर रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
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