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Chandigarh: सेंट कबीर स्कूल को हाईकोर्ट ने दिया बड़ा झटका, अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा रद्द, मांगा जवाब 

Sat, 09 Jul 2022 11:15 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

2012 में स्कूल ने चंडीगढ़ प्रशासन को बायपास कर सीधे नेशनल माइनॉरिटी कमीशन के समक्ष अर्जी देकर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने की मांग कर दी। प्रावधान के अनुसार इसके लिए स्कूल को प्रशासन से एनओसी लेना अनिवार्य था। कमिशन ने वर्ष 2014 में इस प्रावधान का उलंघन कर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस दे दिया। 
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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चंडीगढ़ सेक्टर-26 के सेंट कबीर स्कूल को बड़ा झटका देते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ ने स्कूल को मिले अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जे को रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट का यह आदेश सिंगल बेंच को चुनौती देने वाली चंडीगढ़ प्रशासन की अपील को मंजूर करते हुए आया है। इससे पहले खंडपीठ ने स्कूल दिए गए माइनॉरिटी स्टेटस पर रोक लगा दी थी।

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याचिका में हाईकोर्ट को बताया गया कि 2018 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सेंट कबीर को दिए गए माइनॉरिटी स्टेटस के खिलाफ दायर याचिका में हाईकोर्ट को बताया था कि नेशनल माइनॉरिटी कमीशन ने नियमों का उलंघन कर 10 सितंबर 2014 को सेंट कबीर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने का आदेश दिया था। वर्ष 1988 में पहली बार कबीर एजुकेशन सोसाइटी ने एस्टेट ऑफिस में अर्जी देकर स्कूल के लिए जमीन की मांग की थी। एस्टेट ऑफिस ने 1988 में सोसाइटी को सेक्टर-26 में 20077 स्क्वेयर फीट जमीन 99 वर्ष की लीज पर दी थी। जमीन जारी करते समय यह तय किया गया था कि स्कूल पर डीपीआई चंडीगढ़ के समय-समय पर जारी निर्देश लागू होंगे।

2014 में मिला था अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा

वर्ष 1996 में चंडीगढ़ प्रशासन ने सभी स्कूलों को 15 प्रतिशत सीटें आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों को देने का आदेश दिया था। 2009 में शिक्षा का अधिकार लागू होने के बाद इसे कई स्कूलों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। वर्ष 2012 में स्कूल ने चंडीगढ़ प्रशासन को बायपास कर सीधे नेशनल माइनॉरिटी कमीशन के समक्ष अर्जी देकर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस देने की मांग कर दी। प्रावधान के अनुसार इसके लिए स्कूल को प्रशासन से एनओसी लेना अनिवार्य था। कमिशन ने वर्ष 2014 में इस प्रावधान का उलंघन कर स्कूल को माइनॉरिटी स्टेटस दे दिया। 

अगस्त 2015 में प्रशासन ने स्कूल को कई बार निर्देश देते हुए जमीन की अलॉटमेंट की शर्त के तहत कदम उठाने की मांग की। लेकिन स्कूल ने कहा कि वो माइनॉरिटी इंस्टीट्यूशन है और उस पर यह नियम लागू नहीं होते है। एकल बेंच ने अपने स्कूल के माइनॉरिटी स्टेटस पर रोक लगाकर सुनवाई की और 20 मार्च 2020 को प्रशासन की याचिका खारिज कर दी। प्रशासन ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती दी है। अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने स्कूल के माइनॉरिटी स्टेटस पर रोक लगा दी थी। इसके बाद सभी पक्षों को सुन कर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने यूटी प्रशासन की अपील पर फैसला सुरक्षित कर लिया था। अब हाईकोर्ट ने प्रशासन के हक में फैसला सुनाते हुए सेंट कबीर स्कूल के माइनॉरिटी स्टेटस को रद्द करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने स्कूल को आदेश दिया है कि चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा 2015 में जारी कारण बताओ नोटिस पर वह चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करें। 

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