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हाईकोर्ट की टिप्पणी: बिना तलाक लिए गैर मर्द के साथ सहमति संबंध कामुक और व्याभिचारी जीवन जीना, याचिका खारिज

Sun, 07 Nov 2021 12:04 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार सहमति संबंध में सुरक्षा मांगना सीधे तौर पर आईपीसी के सेक्शन 494 और 495 की कार्रवाई से बचने का प्रयास है। आईपीसी के इन सेक्शन के अनुसार अपने पूर्व के संबंध को कानूनी रूप से तोड़े बगैर किसी अन्य के साथ रहने पर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपने पति से तलाक लिए बगैर किसी अन्य व्यक्ति के साथ सहमति संबंध के लिए दाखिल की गई सुरक्षा की याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि बिना तलाक लिए गैर मर्द के साथ सहमति संबंध कामुक एवं व्याभिचारी जीवन जीना है।

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याचिका दाखिल करते हुए जोड़े ने कहा कि महिला पहले से विवाहित है लेकिन वह अपने प्रेमी के साथ रहना चाहती है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार के रिश्ते को सुरक्षा के लिए सही नहीं माना जा सकता है। इस प्रकार का रिश्ता आईपीसी के सेक्शन 494 और 495 के तहत अपराध की श्रेणी में भी आ सकता है। 
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हाईकोर्ट ने कहा कि याची ने सुरक्षा के लिए बरनाला में एसएसपी को जो मांगपत्र दिया है वह भी फर्जी प्रतीत होता है क्योंकि इस पर डायरी नंबर तक नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह याचिका अपने सहमति संबंध पर हाईकोर्ट की मोहर लगाने का प्रयास है। साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि इस प्रकार सहमति संबंध में सुरक्षा मांगना सीधे तौर पर आईपीसी के सेक्शन 494 और 495 की कार्रवाई से बचने का प्रयास है। आईपीसी के इन सेक्शन के अनुसार अपने पूर्व के संबंध को कानूनी रूप से तोड़े बगैर किसी अन्य के साथ रहने पर दंडात्मक कार्यवाही का प्रावधान है। हाईकोर्ट ने इन टिप्पणियों के साथ ही सुरक्षा की मांग वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। 

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