पर्यावरण मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर।
- फोटो : twitter
पंजाब के खाते में गुरुवार को एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई। अब पंजाब जलवायु परिवर्तन से निपटने वाले 43 देशों के 221 राज्यों की सूची में शामिल हो गया है। इस क्षेत्र में काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था के साथ पंजाब सरकार का समझौता हो गया। अब पंजाब भी पेरिस समझौते के तहत कार्बन डाईआक्साइड (सीओटू) और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को घटाने पर काम शुरू करेगा।
पंजाब भवन में पर्यावरण मंत्री गुरमीत सिंह मीत हेयर ने बताया कि पेरिस समझौता साल 2015 में यूएनएफसीसी-सीओपी 21 के दौरान अपनाया गया था। यह एक कानूनी तौर पर बाइडिंग अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसका उद्देश्य वैश्विक तापमान को दो डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने पर प्राथमिक रूप से पूर्व औद्योगिक स्तर पर 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना है, जिससे जलवायु परिवर्तन के जोखिम और बुरे प्रभाव से बचा जा सके।
पंजाब इस अंतरराष्ट्रीय फोरम में शामिल होने वाला उत्तर भारत का जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरा और छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, पश्चिमी बंगाल और महाराष्ट्र समेत छठा राज्य है। इस समझौते का महत्व और अधिक बढ़ जाता है जब जलवायु परिवर्तन के बुरे प्रभाव जैसे कि मौसम के पैटर्न में बदलाव, जिसके कारण भोजन उत्पादन पर पड़ रहे बुरे प्रभाव, समुद्र के बढ़ते स्तर के साथ विनाशकारी बाढ़ और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।
भारत वैश्विक जलवायु जोखिम सूची 2021 में सातवें स्थान पर होने के साथ-साथ उच्च जोखिम वाले देशों में से एक है। पंजाब समेत भारत के कृषि प्रधान राज्यों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। इस समझौता पर पंजाब सरकार द्वारा पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के डायरेक्टर डॉ. मनीष कुमार और अंडर 2 कुलीशन द्वारा भारत में क्लाइमेट ग्रुप के कार्यकारी निदेशक दिव्या शर्मा ने हस्ताक्षर किए।