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Punjab: राज्यपाल ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के VC की नियुक्ति का प्रस्ताव किया खारिज, दोबारा भेजा जाएगा पैनल

Tue, 11 Oct 2022 10:46 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पंजाब में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद जगजाहिर हैं। दो दिन पहले ही राज्यपाल ने पंजाब राजभवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे।
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राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित, सीएम भगवंत मान व विधानसभा अध्यक्ष कुलतार संधवां। - फोटो : अमर उजाला (फाइल फोटो)
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विस्तार
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पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने मंगलवार को बाबा फरीद यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर के पद पर डॉ. गुरप्रीत सिंह वांडर की नियुक्ति का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। राजभवन ने सरकार के प्रस्ताव पर एतराज जताते हुए कहा कि नियमानुसार इस पद के लिए शार्ट लिस्ट तीन नामों का पैनल भेजा जाना चाहिए। सरकार ने इस संबंध में राज्यपाल से कोई सलाह भी नहीं ली, जबकि इस यूनिवर्सिटी के चांसलर खुद गवर्नर हैं। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा, वह जल्द ही एक पैनल राजभवन को भेजेंगे। 

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यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का पद डॉ. राज बहादुर के इस्तीफे के बाद से खाली है। इस पद पर नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने डीएमसी लुधियाना के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. गुरप्रीत सिंह वांडर के नाम का प्रस्ताव राज्यपाल को भेजा था। 

जुलाई से खाली है वाइस चांसलर का पद 
बाबा फरीद यू्निवर्सिटी के वाइस चांसलर का पद इस साल जुलाई से खाली है। इस पद पर प्रसिद्ध आर्थोपीडिक सर्जन डॉ. राजबहादुर की नियुक्ति थी लेकिन जुलाई महीने में सूबे के सेहत मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा से विवाद के बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद डॉ. बहादुर ने जब मुख्यमंत्री कार्यालय से पद पर बने रहने के अनुरोध के बाद भी अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया तो सरकार ने नई वीसी की तलाश शुरू की। इस पद के लिए सरकार ने विज्ञापन निकाला। 22 आवेदन भी पहुंचे लेकिन सरकार ने डॉ. वांडर की नियुक्ति का प्रस्ताव भेज दिया था।
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राज्यपाल व सरकार के बीच विवाद
पंजाब में सरकार और राज्यपाल के बीच विवाद जगजाहिर हैं। दो दिन पहले ही राज्यपाल ने पंजाब राजभवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के स्वागत में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भगवंत मान की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए थे। इससे पहले भी, राज्यपाल और सरकार उस समय सामने आ गए थे जब सरकार ने विश्वास प्रस्ताव पारित करने के लिए विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का एलान किया था। राज्यपाल ने पहले विशेष सत्र को मंजूरी दे दी लेकिन लेकिन बाद में अपना फैसला वापस ले लिया। इसके बाद सरकार ने फिर से विशेष सत्र बुलाने का फैसला लिया तो राज्यपाल ने मंजूरी देने से पहले सरकार से सत्र के दौरान किए जाने वाले कामकाज का ब्योरा मांग लिया था।

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