उन्होंने कहा था कि विधानसभा के किसी भी सत्र से पहले राज्यपाल या राष्ट्रपति की सहमति एक औपचारिकता है। 75 वर्ष में किसी भी राष्ट्रपति या राज्यपाल ने सत्र बुलाने से पहले कभी विधायी कार्यों की सूची नहीं मांगी।
गौर हो कि हाल ही में पंजाब में सामने आए ऑपरेशन लोटस के चलते आप सरकार और राज्यपाल के बीच तकरार बढ़ी है। आप ने भाजपा पर उनके विधायकों को 25-25 करोड़ रुपये में खरीदने का आरोप लगाया। इसके बाद बहुमत साबित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया।
पहले इसे राज्यपाल की ओर से मंजूरी प्रदान की गई थी। विपक्षी विधायकों के विरोध जताने पर कानूनी राय के बाद राज्यपाल ने इसे रद्द कर दिया था। इसके बाद बिजली और पराली के मुद्दे पर बहस की बात कह सरकार ने फिर सत्र बुलाया, जिस पर फिर दोनों पक्षों में टकराव हुआ। आखिरकार अब 27 सितंबर को इसकी अनुमति दी गई है।