पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने सोमवार को अपने कैबिनेट साथियों के साथ राज भवन में पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित से मुलाकात की और उन्हें लखीमपुर खीरी कांड व किसानों से जुड़े मसलों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के जरिए मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को लखीमपुर हिंसा के पीड़ितों को इंसाफ दिलाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार पर दबाव बनाने की भी अपील की। साथ ही, मुख्यमंत्री ने ज्ञापन में तीन कृषि कानूनों की तुरंत समीक्षा कर रद्द करने पर फिर से जोर दिया।
बाद में चन्नी ने बताया कि वह लखीमपुर खीरी में हिंसक घटना के बारे में प्रधानमंत्री को ध्यान दिलाना चाहते हैं। घटना ने सभी की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे भी ज्यादा दर्दनाक बात यह है कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना में हमारे अन्नदाताओं की जान चली गई। किसान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे।
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प्रधानमंत्री के निजी दखल की मांग करते हुए चन्नी ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस बर्बर कृत्य के पीछे के चेहरे बेनकाब होने चाहिएं, भले ही वे कितना भी रसूख या पहुंच रखने वाले क्यों न हों। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की है कि इस दुखद घटना में जान गंवा चुके किसानों के लिए इंसाफ जल्द दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
इस मौके पर मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री ओपी सोनी, कैबिनेट मंत्री ब्रह्म मोहिन्द्रा, मनप्रीत सिंह बादल, तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा, सुखबिंदर सिंह सरकारिया, विजय इंदर सिंगला, रणदीप सिंह नाभा, डॉ. राजकुमार वेरका, संगत सिंह गिलजियां, परगट सिंह, अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और गुरकीरत सिंह कोटली भी मौजूद रहे।
यह लिखा ज्ञापन में
ज्ञापन में लिखा है ‘आम लोग और किसान मौजूदा व्यवस्था से बेगानापन महसूस कर रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और नैतिकता के क्षरण के कारण चरमरा गई है। यह सही मौका है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा और विश्वास बहाल किया जाए, जिसके लिए लोगों को विचार प्रकट करने के मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने की इजाजत दी जाए, ताकि लोग स्वतंत्र रूप से अपनी भावनाएं जाहिर कर सकें। इस समय लोग निर्भय होकर अपनी दुख-मुसीबतें जाहिर करने के लिए घुटन महसूस कर रहे हैं।’