कैप्टन अमरिंदर सिंह। (फाइल फोटो)
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पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर आंदोलनकारी किसानों से जल्द बातचीत कर उनके मामलों को सुलझाने के प्रभावशाली प्रयास करने की अपील की है। कैप्टन ने सीमापार बढ़ते आतंकी खतरे का हवाला देते हुए लिखा है कि खालिस्तानी संगठन किसान नेताओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कैप्टन ने प्रधानमंत्री के साथ चर्चा के लिए पंजाब से सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने का प्रस्ताव भी रखा है ताकि लंबे समय से चल रहे किसान आंदोलन की समस्या का स्थायी और सुखद हल निकाला जा सके। कैप्टन ने आगाह किया कि पंजाब के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सरहद लगने के कारण सरहद पार की ताकतें मेहनतकश किसानों की भड़की भावनाओं से खेलने की कोशिश कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि कृषि कानूनों को रद्द के लिए किसान दिल्ली-हरियाणा सरहद पर सात महीने से आंदोलन कर रहे हैं। अब तक पंजाब में भी किसानों के धरने-प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहे हैं। भले ही स्थिति अभी काबू में है लेकिन कुछ राजनीतिक दलों की भड़काऊ बयानबाजी, रवैया और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं अमन-कानून की स्थिति के लिए समस्या खड़ी कर सकतीं हैं।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय मंत्रियों और किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र के कृषि कानूनों से पैदा हुई बेचैनी के कारण राज्य का सामाजिक व आर्थिक ताना-बाना खतरे में पड़ने के अलावा रोजमर्रा की राजनीतिक सरगर्मियां भी आंदोलन के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।
विधानसभा चुनाव के दौरान आतंकी हमलों का खतरा
कैप्टन ने यह पत्र कृषि कानूनों को लेकर पंजाब में बढ़ रहे गुस्से के मद्देनजर लिखा है। उन्होंने कहा कि वह इससे पहले जून और दिसंबर, 2020 में लिखे अर्ध-सरकारी पत्रों में इसकी समीक्षा करने के लिए कह चुके हैं। ताजा पत्र पंजाब में भारत-पाकिस्तान सरहद के 5-6 किलोमीटर में पड़ते गांवों में ड्रोन गतिविधियां बढ़ने और सीमा पार से भारत को हथियारों व हेरोइन की खेप भेजे जाने के संदर्भ में लिखा गया है। खुफिया रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि पंजाब विधानसभा चुनाव कुछ महीने बाद होने के कारण आईएसआई के नेतृत्व वाले खालिस्तानी और कश्मीरी आतंकवादी संगठन राज्य में आतंकी गतिविधियों की योजना बना रहे हैं।