आवेदक के पति/पत्नी या नाबालिग बच्चे के नाम पर पंजाब या चंडीगढ़ में पहले से कोई भी फ्रीहोल्ड-लीजहोल्ड रिहायशी प्लॉट या बसेरा यूनिट नहीं होना चाहिए। आवेदनों को अधिकृत बैंकों द्वारा तस्दीक किया जाएगा। केवल उन्हीं आवेदनों पर अलॉटमेंट के लिए विचार किया जाएगा जिनके लिए बैंक की तरफ से कर्ज मुहैया करवाया जाएगा या सहमति पत्र जारी होने से 40 दिन के भीतर आवेदक द्वारा एकमुश्त अदायगी की जाएगी। आवेदक का विवाहित होना अनिवार्य है और आवेदन पति और पत्नी द्वारा साझा होगा। नई नीति के तहत रिहायशी यूनिट को लाभार्थी की मौत होने की स्थिति को छोड़कर 15 साल तक बेचने, तोहफे में देने, गिरवी रखने, ट्रांसफर या लंबी लीज पर देने की मनाही होगी।
ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों में 80 घर प्रति एकड़ होंगे
ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों के मामलों में ईडब्ल्यूएस घरों की संख्या अपार्टमेंटों की संख्या के 10 फीसदी के बराबर होगी। इनका 80 यूनिट प्रति एकड़ के हिसाब से संबंधित जमीन के 80 फीसदी क्षेत्र पर निर्माण होगा। बाकी 20 फीसदी क्षेत्र जरूरी सुविधाओं और सामाजिक बुनियादी ढांचे के लिए रखा जाएगा।
अब अलग होगा स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा विभागों का साझा कैडर
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में पंजाब कैबिनेट ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभागों के कामन कैडर का विभाजन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। इसका उद्देश्य दोनों विभागों के बीच कैडर के मामलों की वजह से होने वाले विवादों के हल में तेजी लाना है।
बता दें कि पंजाब के विभाजन के समय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान एक ही विभाग थे और इस विभाग के लिए साल 1945 के साझा नियम लागू थे। बाद में मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण अलग-अलग हो गए और डायरेक्टोरेट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और डायरेक्टोरेट मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग की स्थापना हुई।
मेडिकल शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग दो अप्रैल, 1973 में अस्तित्व में आया। जबकि डायरेक्टोरेट मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान विभाग के अधीन पैरा-मेडिकल स्टाफ की अलग-अलग कैटेगरी से संबंधित अमले की कैडर कंट्रोलिंग अथॉरिटी अब भी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के पास रही है। दफ्तरी अमले दर्जा -3 और 4 की डायरेक्टोरेट स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण में साझी सीनियोरिटी है।
पंजाब मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट में संशोधन
पंजाब में मोटर व्हीकल टैक्स की वसूली और इसके रिफंड की प्रक्रिया अब और सुविधाजनक होगी। बुधवार को पंजाब मंत्रिमंडल ने पंजाब मोटर व्हीकल टैक्सेशन एक्ट, 1924 (संशोधित) की धारा- 3 और शेड्यूल में संशोधन को मंजूरी दे दी। यह संशोधन मोटर कार या मोटर साइकिल मालिक के किसी अन्य राज्य में वाहन समेत प्रवास पर जाने और पंजाब का निवासी न रहने या पंजाब से बाहर निवास करते वक्त किसी अन्य व्यक्ति के नाम मालिकाना हक तबदील करने के दौरान अदा किए जाने वाले एकमुश्त टैक्स के रिफंड जैसे मुद्दों से जुड़ा।