पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इस बार विधानसभा में जब वर्ष 2023-24 का बजट पेश करेंगे, तब उनके पिटारे में ढेरों विकास योजनाएं तो होंगी लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए पैसा नहीं होगा। पहले से ही तीन लाख करोड़ के कर्ज में डूबे पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार की भी कर्ज पर निर्भरता बढ़ने लगी है। साथ ही, राजस्व उगाही के सारे लक्ष्य भी धराशाही हो रहे हैं। ऐसे में, आय के साधन बढ़ाना वित्त मंत्री के लिए मुख्य चुनौती होगा, जो उन्हें नए बजट में जनता पर करों का बोझ बढ़ाने पर मजबूर करेगा।
राज्य की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार का पहला पूर्ण बजट होगा, क्योंकि पिछले साल सत्ता संभालने के बाद सरकार ने जून में बाकी बचे साल के लिए आंशिक बजट पेश किया था। आंशिक ही सही, लेकिन आप सरकार ने उसमें जनता से किए चुनावी वादे पूरे करने के लिए अनेक योजनाओं का एलान किया, जिनमें से मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा, मूंग की फसल पर एमएसपी, गन्ने का एमएसपी बढ़ाने के साथ-साथ गन्ना किसानों का बकाया चुकाने, कच्चे मुलाजिमों को पक्का करने, ओपीएस लागू करने में, सरकार ने खजाने पर बढ़ते बोझ के बावजूद साहस दिखाया लेकिन दूसरी तरफ राज्य सरकार का चालू वर्ष का वित्तीय घाटा 20000 करोड़ रुपये तक पहुंचने वाला है।
रेत-बजरी से 20000 करोड़ रुपये आने की उम्मीद और 34000 करोड़ की लीकेज रोकने में सरकार विफल रही है। बीते एक साल के दौरान केंद्र सरकार से किसी तरह का वित्तीय सहयोग मिलने के बजाय, आरडीएफ का बकाया न लौटाने, 11000 करोड़ के सीसीएल का मसला न सुलझाने के चलते, आप सरकार की वित्त व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई। इस खराब आर्थिक स्थिति ने आप सरकार को कर्ज लेकर गुजारा करने पर मजबूर कर दिया है। फिलहाल सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर टैक्स बढ़ाया है और उसके सामने आय का कोई नया साधन भी उपलब्ध नहीं है।
नए बजट में प्रदेश की अर्थव्यवस्था किस दिशा में जाएगी, उसकी एक झलक भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की दिसंबर, 2022 की रिपोर्ट से साफ हो गई है। चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक पंजाब का राजस्व घाटा 15349 करोड़ को छू गया है और मार्च, 2023 तक इसके 20000 करोड़ पार कर जाने की संभावना है। पिछले बजट में राजस्व उगाही का जो लक्ष्य 95375 करोड़ निर्धारित किया गया था, उसमें से दिसंबर तक 60095 करोड़ यानी 61 फीसदी ही उगाही हो सकी है। उम्मीद जताई गई है कि आगामी मार्च तक राजस्व उगाही के लक्ष्य को 80 फीसदी तक हासिल कर लिया जाएगा। राजस्व उगाही के तहत विभिन्न मदों से आने वाली आय का आकलन करते हुए कैग ने साफ कर दिया है कि आबकारी नीति से 9647 करोड़ आने का लक्ष्य था, लेकिन 6056 करोड़ यानी 62.17 फीसदी ही मिले हैं। अन्य टैक्स व ड्यूटी से कमाई का लक्ष्य 5390 करोड़ था, जो आधा भी हासिल नहीं किया जा सका।
वित्त मंत्री के दावे अलग
दूसरी ओर, वित्त मंत्री हरपाल चीमा के दावे कैग की रिपोर्ट से अलग हैं। उनका दावा है कि सरकार ने नवंबर 2022 तक ही राजस्व उगाही में 24.5 फीसदी की बढ़ोतरी हासिल की है। जीएसटी से 2021 में जो राजस्व 9612.6 करोड़ रुपये हासिल हुआ था, वह अप्रैल से नवंबर 2022 तक 11967.76 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनकी सरकार ने दिसंबर तक 80000 करोड़ का राजस्व हासिल कर लिया है लेकिन 80 हजार करोड़ की कमाई में 19540 करोड़ रुपये कर्ज के भी जोड़ दिए गए हैं और अगर विभिन्न तरह की सब्सिडी की कुल राशि भी जोड़ ली जाए तो सरकार कमाई के उलट 25 हजार करोड़ के घाटे में दिखाई देगी।