पंजाब में 2017 के विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति के बूते कांग्रेस को जोरदार एकतरफा जीत दिलाने वाले चुनावी रणनीतिकार और जदयू के पूर्व नेता प्रशांत किशोर 2022 के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को सेवाएं देने को तैयार नहीं हैं। कैप्टन द्वारा उन्हें मनाने के लगातार किए जा रहे प्रयास गत शनिवार को भी सिरे नहीं चढ़ सके, जब प्रशांत के नई दिल्ली में मिलने पहुंचे कैप्टन के दोहते निर्वाण को प्रशांत ने पहले तो 2 घंटे तक इंतजार कराया और फिर मिलकर भी कैप्टन का प्रस्ताव ठुकरा दिया।
प्रशांत का यह इंकारनामा ठीक एक दिन बाद आया, जब शुक्रवार को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दावा किया था कि कि प्रशांत से उनके पारिवारिक संबंध हैं और लंबे समय से वे और प्रशांत एक साथ हैं। कैप्टन की ओर से यह भी दावा किया गया था कि लॉकडाउन से पहले उनकी दिल्ली में प्रशांत से मुलाकात हुई थी और उन्होंने कांग्रेस के लिए काम करने की इच्छा जताई थी।
शनिवार को प्रशांत के तेवरों ने कैप्टन और पंजाब कांग्रेस की स्थिति हास्यास्पद बना दी है। दरअसल, प्रशांत इन दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए चुनाव रणनीति बनाने में जुटे हैं और यह माना जा रहा है कि वह इसके बाद आप सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल का साथ देंगे। हालांकि आप की तरफ से इस संबंध में कोई बात नहीं कही जा रही।
प्रशांत के आप से जुड़ने की चर्चाओं के कारण ही पंजाब में कांग्रेस को 2022 के लिए प्रशांत की याद आई। अगर आगामी विधानसभा चुनाव में प्रशांत ने पंजाब में आम आदमी पार्टी का साथ दिया तो भले ही चुनाव परिणाम कुछ भी रहें, इसका ज्यादा नुकसान कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। यह भी गौरतलब है कि 2022 के लिए कैप्टन द्वारा प्रशांत को जोड़ने की कोशिशें काफी समय से जारी हैं। जनवरी में उनके मुख्य प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार भी प्रशांत से मिल चुके हैं। लेकिन अब तक प्रशांत अपने फैसले पर कायम हैं और कांग्रेस का साथ देने को तैयार नहीं हैं।