गोलियों और छर्रों के इस्तेमाल का विवरण मांगा
इस दौरान हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से पूछा कि खनौरी में भारत-पाक की सरहद नहीं थी फिर किसानों पर गोलियां क्यों दागी गईं। हरियाणा सरकार ने बताया कि प्रदर्शनकारियों की हिंसक कार्रवाई में 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे और कई बार चेतावनी के बाद पहले लाठीचार्ज, फिर आंसू गैस, फिर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया लेकिन जब बात नहीं बनी तो रबड़ की गोलियां चलाई गईं। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों पर किस तरह की गोलियों और छर्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है और उनसे इस पर विवरण देने को कहा है।
उल्लेखनीय है कि पंजाब-हरियाणा के बॉर्डर पर किसान 13 फरवरी से एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग को लेकर मोर्चे पर हैं। मोर्चे पर बड़ी संख्या में महिलाएं बच्चों के साथ पहुंच रही हैं। 21 फरवरी को खनौरी बॉर्डर पर बठिंडा के बल्लो गांव के युवक शुभकरण की पुलिस टकराव में मौत हो गई थी।
जस्टिस जय श्री ठाकुर की अध्यक्षता में काम करेगी कमेटी
हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस जय श्री ठाकुर की अध्यक्षता में कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। उनके साथ हरियाणा के एडीजीपी अमिताभ सिंह ढिल्लों व पंजाब के एडीजीपी प्रमोद बन को कमेटी का हिस्सा बनाया है। जस्टिस जय श्री ठाकुर को प्रतिमाह पांच लाख रुपये का भुगतान दोनों सरकारों को बराबर हिस्से में करना होगा।
कमेटी को सौंपी यह जिम्मेदारी
कमेटी तय करेगी कि शुभकरण की मौत हरियाणा के क्षेत्राधिकार में हुई थी या पंजाब के क्षेत्र में। मौत का कारण क्या था और किस हथियार का इस्तेमाल किया गया था। आंदोलनकारियों पर जिन तिथियों पर बल प्रयोग किया गया था, क्या वह परिस्थितियों के अनुरूप था या नहीं। साथ ही शुभकरण की मौत के मुआवजे को लेकर भी कमेटी फैसला लेगी।