भारतीय वायुसेना के जवान की पत्नी द्वारा पति की उच्चाधिकारियों को दी गई झूठी शिकायत को क्रूरता मानते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पति को तलाक का हकदार माना। हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा करना सीधे तौर पर पति के प्रति क्रूरता का मामला बनता है। ऐसे में पति तलाक का हकदार है।
भारतीय वायुसेना में कार्यरत रोहतक निवासी पति ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर बताया कि उसका विवाह होने के बाद पत्नी ने 2002 में उसे छोड़ दिया था। इसके बाद वह लगातार उनसे दूर रही और 2010 में याची व उसके परिवार वालों के खिलाफ कई झूठे मुकदमे दर्ज कराए।
इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने याची और उसके घर वालों को निर्दोष पाया। याची की पत्नी के इस कृत्य की वजह से उन्हें कई वर्ष तक मुकदमों का सामना करना पड़ा। इसे क्रूरता बताते हुए जब रोहतक की फैमिली कोर्ट के समक्ष तलाक के लिए याचिका दाखिल की गई तो फैमिली कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
याची ने कहा कि उसकी पत्नी ने केवल पुलिस को ही नहीं बल्कि वायुसेना के उच्चाधिकारियों को भी याची की शिकायत दी थी जिसके चलते उसका कॅरिअर और प्रतिष्ठा दांव पर लग गई थी। फैमिली कोर्ट ने इन सभी तथ्यों को नजरअंदाज करते हुए तलाक की अपील को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में सभी शिकायतें फर्जी पाई गई हैं और इन्हें केवल पति व उसके परिवार वालों को प्रताड़ित करने के लिए किया गया है। हाईकोर्ट ने यह भी माना कि अपने ससुराल वालों के खिलाफ इस प्रकार का आरोप लगाना पत्नी के आचरण को दर्शाता है। हाईकोर्ट ने पति को तलाक का हकदार मानते हुए उसकी याचिका को मंजूर करते हुए तलाक का आदेश जारी किया है। हालांकि हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को पत्नी को एकमुश्त 2000000 रुपये गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है।