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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट: विवाह की न्यूनतम उम्र भुला करवाई थी शादी, मोहाली के गुरुद्वारे के ग्रंथी के खिलाफ होगी जांच 

Thu, 21 Oct 2021 07:55 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

इससे पहले पंचकूला के मामले में हाईकोर्ट ने पाया था कि लड़की की आयु 19 वर्ष है और वह विवाह के लिए निर्धारित आयु के अनुरूप है, लेकिन लड़के की आयु केवल 20 वर्ष है, जो विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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विवाह करवाते हुए न्यूनतम आयु को ध्यान में न रखने की भूल पंडित जी के बाद अब गुरुद्वारे के ग्रंथी को भारी पड़ गई। कुछ दिन पहले पंचकूला के मंदिर के पुजारी के खिलाफ हाईकोर्ट ने कार्रवाई का आदेश जारी किया था, अब ऐसा ही मोहाली के एक गुरुद्वारे के ग्रंथी के मामले में भी हुआ है। हाईकोर्ट ने इस मामले में मोहाली के एसएसपी को बाल विवाह निषेधअधिनियम में दंडात्मक कार्रवाई का आदेश दिया है।

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मोगा निवासी प्रेमी जोड़े ने सुरक्षा की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में बताया था कि उन्होंने मोहाली के गुरुद्वारे में विवाह किया है। याची की दलील थी कि उन्होंने परिवार के खिलाफ जाकर विवाह किया है और अब उनकी जान को खतरा है। इस खतरे के कारण उन्हें जान बचाने के लिए यहां-वहां शरण लेनी पड़ रही है। हाईकोर्ट को बताया गया कि उन्होंने मोगा के एसएसपी को सुरक्षा से जुड़ा मांगपत्र भी दिया था, लेकिन कोई लाभ नहीं हुआ। 
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हाईकोर्ट ने पाया कि लड़की की उम्र 18 वर्ष है, लेकिन लड़के की आयु केवल 20 वर्ष है, जो विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है। हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह मोहाली में हुआ था, ऐसे में मोहाली के पुलिस कमिश्नर इस मामले में ग्रंथी की भूमिका की जांच करेंगे और आरोप साबित होने पर बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 का उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई करेंगे।

इससे पहले पंचकूला के मामले में हाईकोर्ट ने पाया था कि लड़की की आयु 19 वर्ष है और वह विवाह के लिए निर्धारित आयु के अनुरूप है, लेकिन लड़के की आयु केवल 20 वर्ष है, जो विवाह के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है। हाईकोर्ट ने कहा कि विवाह पिंजौर में हुआ था, ऐसे में पंचकूला के पुलिस कमिश्नर इस मामले में पंडित की भूमिका की जांच करें। यदि यह पाया जाता है कि बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 का उल्लंघन किया गया है तो इसके प्रावधानों के कानूनी कार्रवाई की जाए।
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हाईकोर्ट ने दोनों ही मामलों में कहा कि दोनों जोड़ों में दोनों लड़के और लड़कियां बालिग हैं और ऐसे में उन्हें सुरक्षा का और पसंद का साथी चुनने का अधिकार संविधान देता है। ऐसे में दोनों ही मामलों में प्रेमी जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने का आदेश दिया था। हालांकि विवाह की न्यूनतम उम्र (लड़का 21) भुलाकर विवाह संपन्न करवाने वाले पंडित और ग्रंथी मुसीबत में आ गए हैं।

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