इसके दस्तावेज मंगलवार को पंजाब के एडवोकेट जनरल अतुल नंदा ने हाईकोर्ट को सौंप दिए और कहा कि चाहे वर्ष 1966 में पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट जरूर आया था, जिसमें चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया लेकिन इस एक्ट के बावजूद चंडीगढ़ का पंजाब की राजधानी होने का दर्जा कायम रहा है।
दावे पर कागज नहीं
हाईकोर्ट में अभी तक दोनों राज्यों ने चंडीगढ़ पर दावा ठोकते हुए इसे अपना हिस्सा बताया। लेकिन अभी तक ऐसी कोई नोटिफिकेशन नहीं सौंपी है जिससे चंडीगढ़ पर दावा साबित होता हो। अभी तक जो दस्तावेज सौंपे गए हैं हाईकोर्ट उनको चंडीगढ़ को राजधानी साबित करने के लिए अपर्याप्त मान चुका है। अब केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन को प्रतिवादी बनाने के बाद मामला और रोचक हो चुका है।
याची ने उठाए सवाल
मामले में याची के वकील राजीव आत्मा राम ने कहा कि 1952 एक्ट में चंडीगढ़ पंजाब की राजधानी थी, मगर 1 नवंबर 1966 को जब पंजाब से हरियाणा और हिमाचल अलग राज्य बने और चंडीगढ़ यूटी बन गया। उन्होंने कहा कि अगर ये यूटी अलग हुई है और उसे राजधानी बनाने की नोटिफिकेशन नहीं है तो ऐसे में चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा का हिस्सा नहीं है और ऐसे में दोनों राज्य कैसे चंडीगढ़ को अपना हिस्सा मान रहे है ।