चंडीगढ़। पंजाब विश्वविद्यालय का नाम वैश्विक मंच पर चमकाने वाले वैज्ञानिकों के पास कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। वह अपने मूल कार्य शिक्षण से लेकर शोध का काम कर रहे हैं। पीयू के वरिष्ठ शिक्षकों ने पीयू प्रशासन के अफसरों के निर्णयों पर सवाल खड़े किए हैं। कहा है कि पीयू का नाम करने वाले इन वैज्ञानिकों को प्रशासनिक पदों पर तैनाती देनी चाहिए, लेकिन उन्हें नकार दिया गया। यह अपना बेहतर प्रदर्शन करके पीयू को आगे ले जाने का काम करेंगे।
यूएसए की स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी ने हाल ही में दुनियाभर के वैज्ञानिकों की रैंकिंग जारी की है। पीयू के 17 प्रोफेसरों ने इसमें बाजी मारी। वरिष्ठ शिक्षक कहते हैं कि बाजी मारने वाले इन अधिकांश वैज्ञानिकों के पास कोई बड़ा पद नहीं, जबकि दूसरे कार्यों में लगे लोगों को पद बांटे जा रहे हैं। यदि जिम्मेदारी इन वैज्ञानिकों का मिलती है तो निश्चित रूप से पीयू को आगे ले जाने के लिए काम होगा। एक-एक व्यक्ति को दो से तीन पद दिए गए हैं, जबकि एक व्यक्ति के पास एक ही पद होना चाहिए। वरिष्ठ शिक्षकों का कहना है कि पुटा ने भी यह मुद्दा कुछ दिन तो उठाया लेकिन बाद में शांत हो गए। इस ओर ध्यान केंद्रित करना होगा।
वहीं, दूसरी ओर पीयू प्रशासन का तर्क है कि पद देने से वैज्ञानिकों के पास शोध का समय कम हो जाएगा। ऐसे में उनका मूल कार्य प्रभावित होगा। उनका शिखर पर बने रहना जरूरी है, इसलिए उनकी जिम्मेदारी बढ़ाना उचित नहीं समझा। शोध का कार्य कठिन होता है और समय उसमें अधिक चाहिए। हालांकि, कुछ लोगों को जिम्मेदारी दी गई है। आगे भी ध्यान रखा जाएगा।