चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार का शोध जर्नल ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसाइटी जिसका इम्पैक्ट फैक्टर 15.42 है, में प्रकाशित हुआ है। केमिस्ट्री के क्षेत्र में यह प्रतिष्ठित जर्नल है। इस जर्नल में 15 वर्ष बाद पीयू की ओर से शोध प्रकाशित हुई है और यूआईईटी विभाग से पहली शोध है। यह संस्थान के लिए गर्व की बात है। डॉ. अनिल ने शोध में इंटरमीडिएट कार्बोकटायन का पता लगाया है।
डॉ. अनिल ने बताया कि शोध डिस्टेबलाइज्ड कार्बोकैटायंस केज्ड इन वाटर माइक्रोड्रॉप्लेट्स : आइसोलेशन एंड रीयल टाइम डिटैक्शन ऑफ अल्फा कार्बोकटायन इंटरमीडिएट्स नाम से 18 फरवरी को जर्नल ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुआ। शोध में रसायनिक इंटरमीडिएट कार्बोकटायन का पता लगाया गया है। हालांकि इस कार्बोकटायन की जानकारी पिछले 50 सालों से हैं, लेकिन इसका पता (डिटैक्ट) अब जाकर पीयू की टीम ने किया है। हमने इस इंटरमीडिएट को हाईली पॉजिटिवली चार्जड वाटर माइक्रोड्रॉप्लेट्स (अत्यधिक धनात्मक आवेशित जल सूक्ष्म बूंदों) की सहायता से कैप्चर किया। इसके बाद रियल टाइम डिटेक्शन देसी-एमएस (डिर्सोप्शन इलेक्ट्रोस्प्रे आइनाइजेशन-मास स्पेक्ट्रोमिट्री) के उपयोग से किया गया।
फॉर्मास्युटिक्ल ड्रग्स में इंटरमीडिएट का इस्तेमाल
डॉ. अनिल ने बताया कि इस इंटरमीडिएट का इस्तेमाल फार्मास्युटिकल ड्रग्स और नेचुरल मोलीक्युल्स को बनाने में किया जाता है। डॉ. अनिल वर्ष 2018 से इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे। वर्ष 2020 में इसमें थोड़ी सफलता मिली, उस दौरान भी इस शोध को यूरोपियन जर्नल ऑफ ऑगेर्निक केमिस्ट्री में प्रकाशित किया गया था। उस दौरान ईजेओसी की संपादकीय टीम की ओर से इस काम (शोध) को वीआईपी लेख की श्रेणी में रखा गया था।