फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

घूमने का ऐसा जुनून: पीयू चंडीगढ़ के शोधकर्ता रविंदर ने बीच में छोड़ी पीएचडी, साइकिल से नाप डाले 23 प्रदेश

Mon, 27 Sep 2021 10:09 AM IST
Trainee Trainee कविता बिश्नोई, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

रविंदर बिश्नोई अगस्त 2019 को अपने भ्रमण पर निकले थे। विशेष बातचीत में रविंदर बिश्नोई ने बताया कि रविवार को वे उत्तरकाशी में थे। यहां से नेपाल, सिक्किम, भूटान होकर अरुणाचल प्रदेश जाएंगे। उत्तरकाशी का मनोहरी दृश्य मन को बहुत लुभा रहा है। झरनों की कलकल की आवाज मन को आनंदित कर रही है।
 
विज्ञापन
अपनी यात्रा के दौरान रविंदर बिश्नोई। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अगर आप दिल की सुनकर उस पर अमल करते हैं तो जिंदगी में सब कुछ हासिल कर सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि हम सिर्फ सोचते ही हैं और उसे अमलीजामा पहनाने में हिचक जाते हैं। आज विश्व पर्यटन दिवस पर हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने देश को करीब से जानने के लिए पीएचडी की पढ़ाई को बीच में छोड़ दिया और साइकिल लेकर अपने सफर पर निकल पड़े। ये शख्स हैं पंजाब यूनिवर्सिटी के अंग्रेजी विभाग के शोधकर्ता रहे रविंदर बिश्नोई। जी हां, अगस्त 2019 को ये देश के भ्रमण पर निकले और आज साइकिल पर 23 प्रदेशों के हजारों गांव, शहर और कस्बों को साइकिल से नाप चुके हैं।

विज्ञापन

 
यह भी पढ़ें - भारत बंद: किसानों के समर्थन में मोहाली की हर सड़क बंद, मुल्लांपुर बैरियर पर लगा जाम  

नेपाल से भूटान होते हुए जाएंगे अरुणाचल
विश्व पर्यटन दिवस पर अमर उजाला से विशेष बातचीत में रविंदर बिश्नोई ने अपने सफर की कई बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि रविवार को वे उत्तराखंड के उत्तरकाशी में थे। यहां से नेपाल, सिक्किम, भूटान होकर अरुणाचल प्रदेश जाएंगे। उत्तरकाशी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां का मनोहरी दृश्य मन को बहुत लुभा रहा है। पहाड़ों से बहते झरनों की कलकल की आवाज मन को आनंदित कर रही है। देश में नए-नए स्थानों को देखने की लालसा ने उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है।
विज्ञापन

 
हिसार के गांव लांधड़ी के रहने वाले हैं रविंदर
उन्होंने बताया कि वे मूलरूप से हिसार के गांव लांधड़ी के रहने वाले हैं। 2019 में पीयू के अंग्रेजी विभाग में शोध कर रहे थे। हॉस्टल में रहते हुए देश भ्रमण का विचार मन में आया और पीएचडी बीच में ही छोड़कर साइकिल यात्रा पर निकल पड़े। उन्होंने कहा कि साइकिल से चलना इसलिए चुना, क्योंकि इससे प्रदूषण नहीं होता। यह सफर का सबसे बेहतरीन साधन है। साथ ही साइकिल के सफर में खर्च भी कोई चिंता नहीं रहती, जहां मन किया, साइकिल को खड़ा कर प्रकृति का आनंद ले लिया। साइकिल की वजह से ही सफर अधिक खूबसूरत बना है। रविंदर के अनुसार वे अब तक 23 राज्यों की यात्रा कर चुके हैं। इस दौरान उन्हें हर राज्य की संस्कृति से करीब से रूबरू होने का मौका मिला है।
विज्ञापन

 
पहाड़ों और रेगिस्तान में चादर बिछाकर काटी रातें
रविंदर ने बताया कि वे अपने साथ टेंट, पंचर ठीक करने का सामान, हवा भरने का पंप और चादर के साथ एक-दो पहनने वाले कपड़े ही लेकर निकले थे। उन्होंने सफर में सड़कों के किनारे भी चादर बिछाकर आसमान को छत समझकर रातें काटी हैं। सोशल मीडिया की वजह से लोग उन्हें जानने लगे और सफर के दौरान खाने और रुकने के लिए बुला लेते हैं। रविंदर ने बताया कि कुछ महीने पहले बद्रीनाथ में थे तो उनके साइकिल के गियर और ब्रेक में दिक्कत आ गई थी। इसलिए दुकान मिलने तक 15 दिन पैदल ही सफर किया। इस दौरान थकान तो हुई, लेकिन प्रकृति को निहारते हुए सुकून महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि जीवन एक बार मिलता है, इसलिए लोगों को अपनी इच्छा को मारना नहीं चाहिए। काम वही करें, जो आपको भाता है।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें