हरियाणा के शिक्षा मंत्री कंवर पाल।
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हरियाणा सरकार ने निजी स्कूलों को स्थाई मान्यता देने के लिए संचालकों के हित में मानदंडों में ढील दी है। स्थाई मान्यता देने की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से ऑनलाइन पोर्टल बनाया गया है। यह जानकारी शिक्षा मंत्री कंवर पाल ने विधायक रेणु बाला के सवाल के जवाब में सदन को दी।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम, 2003 के नियम 38 और 39 के अनुसार, 30 अप्रैल, 2003 से पहले चल रहे मौजूदा मान्यता प्राप्त/डीम्ड मान्यता प्राप्त स्कूलों को विभाग से कोई नई मान्यता या अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं लेना होगा। हालांकि, उन्हें अपनी जमीन और भवन के संबंध में रिटर्न जमा करना होगा और हर 10 साल के बाद इन स्कूलों की समीक्षा की जाएगी। जो स्कूल हरियाणा स्कूल शिक्षा नियम, 2003 से पहले चल रहे थे, उन्हें मौजूदा स्कूल माना गया है। ऐसे स्कूलों को अपने आप मान्यता मिल गई है। प्रदेश में ऐसे अस्थाई मान्यता वाले 3870 स्कूल हैं। इनमें 562 पांचवीं तक, 1473 आठवीं, 1214 दसवीं तक और 621 स्कूल 12वीं तक हैं।
नए सिरे से करना होगा आवेदन
निजी स्कूलों को स्थाई मान्यता प्रदान करने के लिए मौलिक शिक्षा विभाग द्वारा पहली से आठवीं कक्षा तक स्कूल खोलने की अनुमति दी जाती है। यदि सोसायटी अपने स्कूलों को 9वीं से 12वीं कक्षा तक अपग्रेड कराना चाहती है तो उसे वर्तमान में हरियाणा विद्यालय शिक्षा नियम, 2003 के तहत अनुमति/स्थायी मान्यता के लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में नए सिरे से आवेदन करना होगा।
अस्थाई मान्यता में भूमि का एरिया किया कम
नियम पूरे न करने वाले स्कूलों को अस्थाई मान्यता देने के लिए भी कई तरह की छूट दी गई हैं। इनके लिए भूमि की उपलब्धता एक बड़ी समस्या है। सरकार ने इस समस्या पर गंभीरत से विचार करते हुए प्राथमिक स्कूल के लिए क्षेत्र की अनिवार्यता 500 वर्ग मीटर से घटाकर 250, मिडल के लिए 800 से 500 वर्ग मीटर कर दी है। उच्च विद्यालय के लिए 2000 से 1200 और वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के लिए कला एवं वाणिज्य संकाय में 3000 से 1800 वर्ग मीटर कर दी है। कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के लिए क्षेत्र की अनिवार्यता 4000 वर्ग मीटर से घटाकर 2000 वर्ग मीटर कर दी गई है।