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Chandigarh: धनास के स्कूल की प्रिंसिपल नेशनल अवॉर्ड के लिए चयनित, शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति देंगी सम्मान

Fri, 26 Aug 2022 02:33 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सीमा रानी ने साल 1996 में अंग्रेजी शिक्षिका के पद पर नौकरी शुरू की थी। शहर के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाने के बाद 2018 में जीएमएसएसएस धनास में प्रिंसिपल के पद पर ज्वॉइन किया। ज्वॉइनिंग के बाद से स्कूल में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ रही है।
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सीमा रानी। - फोटो : फाइल
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विस्तार
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चंडीगढ़ के जीएमएसएसएस धनास की प्रिंसिपल सीमा रानी को नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा। उनका नेशनल अवॉर्ड टू टीचर्स 2022 के लिए चयन हुआ है। 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर दिल्ली के विज्ञान भवन में होने वाली अवॉर्ड सेरेमनी में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें मेरिट सर्टिफिकेट, 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार और सिल्वर मेडल से सम्मानित करेंगी।

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शिक्षा विभाग और प्रिसिंपल सीमा रानी को मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी सूचना दी। अवॉर्ड के लिए चार अगस्त को सीमा रानी की शिक्षा मंत्रालय के सीनियर अफसरों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन हुई थी। 

चंडीगढ़ की झोली में पांच साल बाद यह अवॉर्ड आया है। इससे पहले साल 2017 में चंडीगढ़ से जीएमएसएसएस-16 में म्यूजिक की लेक्चरर सुखराज कौर संधू को नेशनल अवॉर्ड मिला था। इस बार इस अवॉर्ड के लिए कुल सात आवेदन ही विभाग के पास आए थे। देशभर से कुल 46 शिक्षकों का इस अवॉर्ड के लिए चयन हुआ है।

1996 में अंग्रेजी शिक्षिका के पद पर शुरू की नौकरी

सीमा रानी ने साल 1996 में अंग्रेजी शिक्षिका के पद पर नौकरी शुरू की थी। शहर के विभिन्न स्कूलों में पढ़ाने के बाद 2018 में जीएमएसएसएस धनास में प्रिंसिपल के पद पर ज्वॉइन किया। ज्वॉइनिंग के बाद से स्कूल में लगातार बच्चों की संख्या बढ़ रही है। 2019-20 में 2922 छात्र और आज स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या 3500 से अधिक है। स्कूल को डबल शिफ्ट में चलाया जाता है।

सीमा रानी ने स्कूल में किए कई प्रयोग

नेशनल अवॉर्ड मिलने की घोषणा से सीमा रानी काफी खुश हैं। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए उन्होंने कई प्रयोग किए। उनका एक ही मकसद है कि विद्यार्थियों का नैतिक मूल्य बढ़े और जब वे स्कूल से निकलें तो अच्छे इंसान बनकर जाएं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से सीधे संवाद और आत्मीयता से मिलने पर उनकी झिझक तो दूर होती ही है साथ ही उन्हें बेहतर तरीके से समझा जा सकता है। इसलिए वे प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं कक्षा में खुद जाती हैं और निजी तौर पर उनसे इंटरेक्ट करती हैं। वह कई बच्चों को नाम से जानती हैं। यही वजह है कि बच्चे पढ़ाई के साथ साथ अन्य क्षेत्र में भी अपनी काबिलियत दिखा रहे हैं।

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