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नवजोत सिद्धू की प्रेस कॉन्फ्रेंस: कृषि कानूनों के लिए अकाली दल को बताया जिम्मेदार, सुखबीर बादल पर लगाया आरोप

Wed, 15 Sep 2021 02:20 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

इससे पहले नवजोत सिंह सिद्धू ने केंद्र सरकार द्वारा फसल खरीद के लिए फर्द को अनिवार्य किए जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि  केंद्र सरकार ऐसे नियम थोपकर एक देश-दो बाजार का सिस्टम लागू कर रही है।
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पंजाब कांग्रेस प्रधान नवजोत सिद्धू की प्रेस कांफ्रेंस। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू ने कहा है कि वह डंके की चोट पर कह सकते हैं कि तीनों काले कृषि कानूनों के पीछे बादलों (प्रकाश सिंह बादल और सुखबीर बादल) का ही आइडिया काम कर रहा है। प्रदेश प्रधान बनने के बाद बुधवार को चंडीगढ़ स्थित कांग्रेस भवन में पहली प्रेस कांफ्रेंस करते हुए सिद्धू ने केंद्र सरकार द्वारा लाए तीन कृषि कानूनों के लिए शिअद और बादल परिवार पर जमकर निशाना साधा। 

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पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल पर सियासी हमला करते हुए सिद्धू ने कहा कि यह बादल ही थे, जिन्होंने पर्दे के पीछे खेल खेला। नवजोत सिद्धू ने आरोप लगाया कि पंजाब में अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में उक्त कानून को पहले राज्य में लागू किया गया और उसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश में इसे लागू कर दिया। 

मोदी और बादल एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। उन्होंने कहा कि बादल 2013 में पंजाब कांट्रैक्ट एक्ट 2013 लेकर आए। यही कानून तीन कृषि कानूनों में से एक है, जिसमें एमएसपी की कोई बात नहीं की गई है। सिद्धू ने बताया कि 108 फसलों का शेड्यूल तैयार करके एक्ट से जोड़ा गया और दो एमएसपी वाली फसलें भी शामिल की गईं, ताकि एमएसपी से कम पर फसलें खरीदी जा सकें।
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केंद्र ने बादल के कानूनों की कॉपी मारी
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वास्तव में यह भाजपा और शिअद के बीच नाखून-मांस का रिश्ता है और साजिश के तहत इस अधिनियम में किसानों से अदालत जाने का अधिकार छीन लिया गया। उन्होंने कहा कि किसान की तरफ कोई पैसा बकाया है तो उसकी फर्द में दर्ज होगा। इसके अलावा किसान का कोई विवाद है तो वह कहीं आवाज नहीं उठा सकता। यदि किसान डिफॉल्ट करता है तो उसे एक महीने की सजा का प्रावधान है। सिद्धू ने कहा कि केंद्र सरकार ने बादलों के कानून की ही कॉपी मारी है। किसानों को मारने की शुरुआत बादलों ने की है। उन्होंने आगे कहा कि बादल द्वारा पेश किए गए विधेयक में एमएसपी की कोई गारंटी नहीं है। यदि किसान का विवाद है तो वह अपनी जमीन नहीं बेच सकता। किसान का पंजीकरण होगा और यही केंद्र के कानून में निहित है। उन्होंने कहा कि अकाली दल और केंद्र दोनों ने किसानों को गुलाम बनाने की कोशिश की है। 

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