पंजाब में स्कूलों में संक्रमण को लेकर शुरू हुई कोरोना जांच के लिए सरकार ने नई गाइड लाइन जारी की है। इसके तहत 10 प्रतिशत से अधिक संक्रमण मिलने पर स्कूल को हाई रिस्क जोन में रखा जाएगा। इस स्कूल में पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों और शिक्षकों की जांच के बाद स्कूल को बंद कर दिया जाएगा। संक्रमण से बचाव के लिए हर दो सप्ताह में उन्हें संक्रमण की जांच करानी होगी।
पंजाब में 2 अगस्त से सभी स्कूल खुल गए हैं। स्कूल खुलते ही विद्यार्थियों में संक्रमण के अब तक कई मामले भी आ चुके हैं। स्कूलों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए पंजाब सरकार के साथ ही अभिभावक भी चिंतित हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि हालात अभी काबू में हैं, इसलिए स्कूल अभी बंद नहीं किए जाएंगे। साथ ही स्कूलों में हर रोज रैंडम कोरोना संक्रमण की जांच के लिए 10 हजार आरपीटीपीसी टेस्ट करने के निर्देश भी जारी कर दिए।
अब सरकार ने स्कूलों में संक्रमण को रोकने के लिए होने वाली कोरोना जांच के लिए नई गाइड लाइन जारी की हैं। इसके तहत स्कूलों को चार वर्गों में बांटा गया है। पहली श्रेणी में उस स्कूल को रखा गया है जिसमें 1 प्रतिशत से कम संक्रमण मिलता है। दूसरी श्रेणी में उस स्कूल को शामिल किया जाएगा, जिसमें 1 से 5 प्रतिशत संक्रमण के मामले मिलते हैं। 6 से 10 प्रतिशत संक्रमण को मध्यम श्रेणी में रखा जाएगा। इन तीनों श्रेणियों में शामिल स्कूलों में रैपिड एंटीजन टेस्टिंग की जाएगा, जिससे संक्रमण के विषय में जल्दी जानकारी मिल सके।
इन पर रहेगी खास नजर
नई गाइड लाइन के तहत स्कूलों में आने वाले उन लोगों पर विशेष नजर रखने को कहा गया है जिनको संक्रमण होने का सबसे ज्यादा खतरा है। इसके साथ ही स्कूल में टेस्टिंग के दौरान एक ग्रुप में शामिल किसी के भी संक्रमित मिलने पर अन्य सभी को भी क्वारंटीन कर दिया जाएगा। स्कूलों में आने वाले शिक्षकों के लिए वैक्सीनेशन भी जरूरी किया गया है।
अभिभावकों में डर
स्कूलों में अब तक 33 विद्यार्थियों के संक्रमित मिलने के बाद अभिभावकों में डर है। इस कारण से 40 प्रतिशत विद्यार्थी स्कूल नहीं आ पा रहे हैं। अभिभावकों ने विद्यार्थियों को स्कूल जाने के लिए जरूरी पत्र जारी नहीं किया है।
कोट
पंजाब सरकार स्कूलों में संक्रमण को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। टेस्टिंग की संख्या बढ़ाने के साथ ही विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य विद्यालय स्टाफ को कई दिशा निर्देश दिए गए हैं। इसी का परिणाम है कि अन्य राज्यों की अपेक्षा पंजाब के स्कूलों में हालात अभी काबू में हैं।
- विजय इंदर सिंगला, शिक्षा मंत्री, पंजाब