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पंजाब में चुनाव, मंदिर में नेताजी: राजनीतिक दलों में लगी 38 फीसदी हिंदू मतदाता को अपनी तरफ खींचने की होड़

Thu, 09 Dec 2021 10:48 AM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)

सार

पंजाब में 25 साल पुराना अकाली-भाजपा गठबंधन टूट चुका है और अकाली दल बसपा के हाथी पर सवार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से अलग हो गए हैं। सिद्धू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हो चुके हैं। एससी चेहरा चन्नी सीएम हो गए हैं।
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पंजाब में मंदिरों में माथा टेक रहे नेता। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब की सियासत पर बारीकी से नजर रखने वालों को भी यह याद नहीं कि इससे पहले कभी राज्य में चुनाव के मौके पर मंदिरों को इतनी अहमियत मिली थी या नहीं, जितनी इन दिनों मिल रही है। सुखबीर हो या केजरीवाल, नवजोत सिंह सिद्धू या सीएम चन्नी, सभी नेतागण मंदिरों में घंटियां बजाने और आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। पंजाब के चुनाव में इस बार नेताओं के बीच मंदिरों में घंटियां बजाने की जो होड़ दिख रही है, उसकी वजह यह है पंजाब में 38 फीसदी हिंदू मतदाता।

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भाजपा के पूर्व प्रदेश प्रधान मनोरंजन कालिया का कहना है कि अकाली दल, आप व कांग्रेसी नेताओं के मंदिरों में नतमस्तक होने का कारण 38 फीसदी हिंदू मतदाता है। यह राजनीति से प्रेरित है क्योंकि चुनाव सिर पर आ चुके हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी का समर्थन कट्टरपंथियों ने किया था, अब अपनी छवि सुधारने के लिए हिंदू मतदाता याद आ रहे हैं। 

केदारनाथ धाम भी पहुंचे चन्नी

पंजाब का चुनाव मुख्य रूप से सिखों को केंद्रित कर लड़ा जाता रहा है लेकिन इस बार हिंदू और एससी मतदाता भी केंद्र में हैं। खासकर नेताओं द्वारा मंदिर में माथा टेकने की होड़ मची हुई है। मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी पिछले दिनों केदारनाथ धाम के दर्शन कर लौटे हैं। वह जालंधर स्थित प्रतिष्ठित शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में भी माथा टेकने जा चुके हैं। 

भगवान परशुराम तपोस्थली को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए दस करोड़ रुपये भी जारी कर उन्होंने हिंदू मतदाताओं का दिल जीतने की कोशिश की है। भगवान परशुराम की माता रेणुका से जुड़े स्थल के विकास के लिए उन्होंने 75 लाख रुपये देने की बात कही। यह घोषणा भी की कि महाभारत, रामायण, गीता पर शोध कार्य के लिए पंजाबी यूनिवर्सिटी में एक पीठ का गठन किया जाएगा। यह कहना भी नहीं भूले कि वह संस्कृत भाषा सीखेंगे और फिर महाभारत पर पीएचडी करेंगे। चन्नी चार दिन पहले श्री बगलामुखी माता के दर्शन कर लौटे हैं।

माता चिंतपूर्णी के दर्शन कर आए सुखबीर 

शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर गए। उन्होंने वादा भी किया कि सरकार बनने पर वह दोबारा दर्शन के लिए आएंगे। वह राजस्थान के सालासर में बालाजी मंदिर भी जा चुके हैं। वह अपने तमाम साथियों को बस में साथ लेकर सालासर बाला जी मंदिर गए और वह माता अंजनी मंदिर भी गए। जालंधर में श्री देवी तालाब मंदिर भी उन्होंने हाजिरी लगाई और फिर पंजाब के ही राजपुरा में भगवान शिव के मंदिर में दर्शन किए। इन सारे मंदिरों में दर्शन करते हुए अपने फोटो उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शेयर भी किए। उनकी पार्टी की तरफ से यह बताया भी गया कि एक दर्जन और मंदिरों में दर्शन करने के कार्यक्रम बन रहा है।

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देवी तालाब मंदिर पहुंचे केजरीवाल

पंजाब के चुनाव में हिस्सा ले रही आम आदमी पार्टी के दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी अक्तूबर में जालंधर स्थित देवी तालाब मंदिर गए थे। उन्होंने माता के जागरण में भी हिस्सा लिया था। पीपीसीसी प्रधान नवजोत सिंह सिद्धू पिछले दिनों परिवार के साथ माता वैष्णो देवी के दरबार में गए और वहां से आशीर्वाद लिया। सिद्धू की लगातार फोटो मंदिरों में माथा टेकने की सोशल मीडिया पर अपलोड हो रही हैं। 

अब बदल रही है पंजाब में सियासत 

पंजाब में 25 साल पुराना अकाली-भाजपा गठबंधन टूट चुका है और अकाली दल बसपा के हाथी पर सवार है। कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेस से अलग हो गए हैं। सिद्धू प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हो चुके हैं। एससी चेहरा चन्नी सीएम हो गए हैं। कैप्टन अमरिंदर सिंह के नई पार्टी बनाकर बीजेपी के साथ चुनाव लड़ने का फाइनल कर चुके हैं। तमाम नेता हिंदुओं के विश्वास को बनाए रखने को मंदिरों का सहारा लेने को मजबूर हो गए हैं। इन सबके बीच अकाली दल के लिए चुनौती खड़ी हो सकती है। बीजेपी से अलग हो जाने के बाद अकाली दल के लिए हिंदू मतदाताओं का भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती है। हिंदू वोटों के नुकसान को रोकने के लिए ही अकाली दल के प्रधान सुखबीर सिंह बादल मंदिर-मंदिर माथा टेक रहे हैं। 

आम आदमी पार्टी भी 2017 की पुनरावृत्ति नहीं चाहती है। 2017 में आप से हिंदू मतदाता दूर हो गया था क्योंकि आप पर आरोप लगा था कि पार्टी के नेता कट्टरपंथियों के हिमायती हैं और चुनाव में विदेशों में बैठे कट्टरपंथी नेता ही उनको फंडिंग कर रहे हैं। यही वजह है कि हिंदुओं की बहुसंख्यक सीटों से आप का बुरा हाल हुआ। पठानकोट से लेकर होशियारपुर, जालंधर सिटी, अमृतसर शहरी और लुधियाना शहरी से आप का एक भी उम्मीदवार जीत नहीं पाया। 

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