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Punjab: खुली बहस के बाद अब सीएम को घेरेगा विपक्ष, गवर्नर के सामने उठाएंगे पैसे की बर्बादी का मुद्दा

Fri, 03 Nov 2023 10:03 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

शिअद ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि वह प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ लगाए अपने आरोपों के लिए माफी मांगे या अगली कार्यवाही का सामना करना के लिए तैयार रहें। इससे पहले ऐसी ही चुनौती भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ भी दे चुके हैं।
 
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सीएम भगवंत मान - फोटो : twitter
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विस्तार
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मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में आयोजित खुली बहस के दौरान एसवाईएल का इतिहास खंगालते हुए अकाली दल और कांग्रेस के तत्कालीन नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया था। अब इसके जवाब में शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और भाजपा ने मुख्यमंत्री मान को घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। 

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शिअद ने मुख्यमंत्री मान की ओर से एसवाईएल के मुद्दे पर प्रकाश सिंह बादल पर लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और मुख्यमंत्री पर खुले तौर पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया।

उधर, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने मान के आरोपों का खंडन करने के बाद अब इस मामले को राज्यपाल के समक्ष ले जाने का फैसला किया है। अगले कुछ दिनों में विपक्षी दलों के नेता मुख्यमंत्री द्वारा लगाए गए झूठे आरोपों की शिकायत राज्यपाल से करने जाएंगे। साथ ही बहस को जनता के पैसे की बर्बादी बताते हुए शिकायत भी की जाएगी। 
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फिलहाल शिअद ने मुख्यमंत्री को चुनौती दी है कि वह प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ लगाए अपने आरोपों के लिए माफी मांगे या अगली कार्यवाही का सामना करना के लिए तैयार रहें। इससे पहले ऐसी ही चुनौती भाजपा के प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ भी दे चुके हैं। कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी मुख्यमंत्री की ओर से एसवाईएल के मुद्दे पर कांग्रेस को कथित तौर पर जिम्मेवार ठहराने की आलोचना की है।

बहस का आयोजन पड़ोसी राज्यों को पानी देने की साजिशः सुखबीर
शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर पंजाब का पानी पड़ोसी राज्यों के देने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि लुधियाना में एक-व्यक्ति की बहस का आयोजन हरियाणा और राजस्थान को पंजाब का पानी देने की उस रणनीति का हिस्सा थी, जिसके जरिए इस समर्पण को सार्वजनिक और आधिकारिक बनाने की कोशिश की गई। 

सुखबीर बादल ने ट्वीट किया- दरबारा सिंह के बाद भगवंत मान पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने पंजाब के नदी जल पर राईपेरियन अधिकार को लेकर अपनी सरकार के आत्मसमर्पण को रिकॉर्ड में रख लिया है। एक तरफ जहां पूरा राज्य गैर-राईपेरियन पड़ोसी राज्यों को पानी देने के खिलाफ आंदोलित है, हमारे सीएम साहब वास्तव में पंजाब का पानी उन्हें देने के लिए अपनी और अपनी सरकार की तत्परता व्यक्त करने के लिए पत्र लिख रहे हैं। दरअसल वह उनसे पूछ रहे हैं कि उन्हें कितने पानी की जरूरत है। यह पंजाब के मामले में एक अविश्वसनीय आत्मसमर्पण और आपदा है।
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केजरीवाल के इशारे पर काम
बादल ने आगे लिखा- हरियाणा और राजस्थान अब इन पत्रों को सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेंगे। अगर भगवंत मान मुख्यमंत्री रहते हुए आधिकारिक तौर पर पानी देने के लिए तैयार हैं, तो वह किस आधार पर एसवाईएल का विरोध करेंगे? यह सब पंजाब की वर्तमान और भावी पीढ़ियों को बर्बाद करने के लिए अरविंद केजरीवाल के इशारे पर किया जा रहा है। कल लुधियाना में एक-व्यक्ति की बहस इस समर्पण को सार्वजनिक और आधिकारिक बनाने के लिए ही आयोजित की गई थी।

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