प्रोजेक्ट के सियासी मायने भीतत्कालीन सीएम भजन लाल ने इस योजना पर 1994-95 में काम करना शुरू किया था। तब सर्वे भी हुआ था। इसके बाद यह योजना फाइलों में ही दबी रह गई। साल 2015 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने इस दबी हुई फाइल को निकाला और प्रोजेक्ट को शुरू करवाने का प्रयास किया था लेकिन किसी न किसी वजह से यह मामला लटका रहा।
इस प्लानिंग के सियासी मायने भी है। क्योंकि अभी तक के मुख्यमंत्रियों पर ये आरोप थे कि उन्होंने सारे बड़े प्रोजेक्ट पुराने रोहतक जिले को दिए। इसके बनने से मैसेज जाएगा कि भाजपा-2 सरकार यमुनानगर, करनाल, पानीपत यानि जीटी बेल्ट पर ध्यान दे रही है।
ये है एक्सप्रेस वे का प्रोजेक्ट
- कुल लंबाई-200 किमी, 160 किमी एनसीआर क्षेत्र और 40 किमी यमुनानगर जिला।
- अनुमानित लागत-करीब आठ हजार करोड़ रुपये।
- यमुनानगर, इंद्री, करनाल, मूनक, पानीपत और सोनीपत, दिल्ली तक रूट।
- चार रेलवे ओवर ब्रिज और 10 फ्लाईओवर और 10 की सर्विस लेन होगी।
- राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर यातायात दबाव कम होगा।
बेहतर कनेक्टिविटी न होने से हिमाचल, उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी, हरियाणा और दिल्ली के बीच व्यापारिक संबंध स्थापित नहीं हो पा रहे हैं। पंजाब, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर को उत्तराखंड और यूपी से जोड़ने वाला हाईवे पहले ही बन चुका है।
इसके अतिरिक्त हिमाचल से कनेक्टिविटी के लिए जगाधरी पावंटा साहिब नेशनल हाईवे भी फोर लेन बनाया जाना है। ऐसे में यमुना एक्सप्रेस-वे पर यात्रा करने वाले पैसेंजर्स, कामर्शियल और कारगो वाहनों के लिए यमुनानगर टर्मिनल के रूप में विकसित होगा।
पश्चिमी यमुना नहर के पैरलल बनने वाला ये एक बड़ा प्रोजेक्ट है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की थी। जल्द ही इसकी डीपीआर के ऑर्डर जारी हो जाएंगे। इस एक्सप्रेस वे के बनने से न केवल यमुनानगर बल्कि आसपास के राज्यों को भी भी बड़ा फायदा पहुंचेगा। -रतनलाल कटारिया, केंद्रीय मंत्री
एक सप्ताह पहले ही मैंने ज्वाइन किया है। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों से बात करूंगा। उसके बाद ही पूरी डिटेल दी जा सकेगी। -राजीव अरोड़ा, चेयरमैन, एचएसआरडीसी