पंजाब के शहरी निकायों में लोग अब अपने मकानों के ढांचे में आवश्यकतानुसार बदलाव कर सकेंगे। स्थानीय निकाय विभाग ने शहरी स्थानीय निकायों और सुधार ट्रस्टों में भवन निर्माण में उल्लंघन को लेकर ढील देने की कवायद शुरू कर दी है। आम जनता से फीडबैक मिलने के बाद नगर नियोजन विभाग ने निर्माण में अनियमितताओं का अध्ययन करना शुरू कर दिया है। नए नियमों के तहत ऐसे मकानों का नियमितीकरण करवाया जा सकेगा, जिनके निर्माण में किसी तरह से नियमों का उल्लंघन हुआ है।
सूत्रों के अनुसार सरकार की इस कवायद को निकट भविष्य में हो रहे निकाय चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। पंजाब में बहुमत के साथ सत्ता में आई आम आदमी पार्टी की सरकार निकाय चुनाव को भी कैश करने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि विभाग ने इसको लेकर स्थानीय शहरी निकायों में एक सर्वेक्षण करवाया है, जिसकी फीडबैक के आधार पर सरकार अब नियमों में ढील देने की तैयारी में है। इसका सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा। बाकायदा इसे कानून के दायरे में लाया जाएगा।
दरअसल यह मामला तब उठा जब अवैध रूप से मकान निर्माण कर रहे कुछ इंडीपेंडेंट फ्लोर बिल्डर की शिकायत मिलने के बाद विभाग ने रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (आरईआरए) को उनके लाइसेंस रोकने के लिए लिखा। इस दौरान विभागीय टीम ने फील्ड का दौरा किया, जिसमें लोगों ने निर्माण में हुई कुछ खामियों को नियमित करने की मांग की। विभाग ने इसको लेकर रिपोर्ट सरकार को सौंपी है।
वहीं, स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. इंदरबीर निज्जर का कहना है कि भवन निर्माण को लेकर बनाए गए नियमों में बहुत पेचीदगी है। जमीनी हकीकत को ध्यान में रखते हुए कानून के दायरे में लोगों को नियमों में राहत प्रदान की जाएगी, इसके लिए विभागीय अधिकारी काम कर रहे हैं। जल्द ही नए नियमों को लागू किया जाएगा।
भवन निर्माण को लेकर नियमों में कई खामियां
नगरपालिका कानून के तहत भवन निर्माण को लेकर नियमों में कई तरह की खामियां हैं। इसके तहत बिल्डरों को घरों की योजनाओं को मंजूरी के साथ स्वतंत्र मंजिलों के निर्माण की अनुमति है। 150 वर्ग मीटर तक के मकानों के ग्राउंड कवरेज को बढ़ाकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है। फॉर्मूला फॉर फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) बढ़कर 1:2.00 हो गया है और अधिकतम ऊंचाई 50 फीट तक बढ़ गई है। ये सभी प्रावधान नेशनल बिल्डिंग कोड 2005 के सीधे विरोध में हैं। विभाग अब कानून के दायरे में ऐसे नियम बनाने जा रहा है, जिससे कानून का उल्लंघन भी न हो और लोगों को राहत भी मिल सके।