चंडीगढ़। कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। इससे अभिभावकों के साथ विशेषज्ञ भी बेहद खुश हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बेहद खुशी की बात है। क्योंकि देश की 45 प्रतिशत आबादी 18 साल से कम उम्र वालों की है। ऐसे में अब तक लगभग आधी से कुछ ज्यादा आबादी को ही वैक्सीन का सुरक्षा कवच प्राप्त है। अब बच्चों को टीका लगने की रफ्तार से देश में सुरक्षा चक्र और मजबूत होगा। वहीं इस अभियान में तेजी लाने में बच्चे, वायु और कोरोना कॉमिक-5 सहायक साबित होगी। इसे पीजीआई सामुदायिक चिकित्सा के डॉ. रविन्द्र खैवाल और पीयू केपर्यावरण विभाग की चेयरपर्सन डॉ. सुमन मोर ने फरवरी में ही तैयार कर लिया था। डॉ. रविन्द्र का कहना है कि कॉमिक के माध्यम से बच्चों के मन से टीके को लेकर डर निकालने का प्रयास किया गया है। कॉमिक में बच्चों के माध्यम से टीके फायदे बताने व बड़ों को जागरूक करने का संदेश दिया गया है।
बालरोग विशेषज्ञ डॉ. आरएस बेदी व भारतीय बाल अकादमी की डॉ. गुजंन बवेजा का कहना है कि विश्व में भारत सबसे युवा देश माना जाता है। ऐसे में तीसरी लहर की आशंका के बीच 18 साल से कम उम्र वालों को टीका न लगा होना चिंता का विषय था, लेकिन अब चिंता दूर होगी। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में नहीं डरेंगे। डॉ. बेदी का कहना है कि कोरोना के कारण शिक्षा में आए व्यवधान का सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव छोटे बच्चों पर पड़ा है। टीकाकरण के बाद उस अवरोध को दूर करने में मदद मिलेगी। डॉ. बेदी का कहना है कि यह खुशी की बात है कि देसी कंपनी भारत बायोटेक की कोवैक्सीन ही बच्चों को भी लगाई जाएगी। कोवैक्सीन 18 वर्ष से ऊपर के व्यस्कों और बुजुर्गों को लगाई जा रही है। इसका नुकसान न के बराबर है।
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टीका लग जाने के बाद तनाव नहीं होगा
मैं तो इस बात से ज्यादा चिंतित थी कि अपने बच्चे को स्कूल भेजूं या नहीं। एक तरफ इस बात से तनाव हो रहा था कि बच्चा बाकी बच्चों से पिछड़ न जाए। लेकिन अब टीका लग जाने के बाद कोई तनाव नहीं होगा।
-पूजा देवी, हल्लोमाजरा
सरकार ने टीकाकरण की अनुमति देकर चिंता दूर की
तीसरी लहर में बच्चों पर ज्यादा खतरा होने की आशंका जताई जा रही है। इससे अभिभावक बहुत चिंतित थे। सरकार ने बच्चों के टीकाकरण को अनुमति देकर हमारी चिंता दूर करने का काम किया है। इस निर्णय से हम बहुत खुश हैं।
-निशा, सेक्टर 22
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