1857 की क्रांति में मारे गए सैनिकों के अवशेषों के शोध में एक और बड़ा खुलासा हुआ है। वैज्ञानिकों ने साबित किया है कि सभी सैनिकों के सिर में गोली मारी गई थी। मारे गए सैनिक जांबाज थे, जिनमें फ्रांस के शासक नेपोलियन बोनापार्ट और हिटलर की सेना के सैनिकों जैसा जोश था। इनकी हड्डियों व दांतों में कैल्शियम व फास्फोरस की मात्रा अधिक मिली है। दांतों में हाइपो प्लेजिया बीमारी मिली है जो तनाव से होती है। तनाव अधिक होता है तो दांतों पर लकीरें बन जाती हैं। यह तनाव इनको किशोरावस्था में रहा है।
इन सभी तथ्यों का पंजाब यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के डॉ. जेएस सहरावत ने अपने शोध में खुलासा किया है। उन्होंने 282 सैनिकों के मिले 9500 दांतों में से 4500 दांतों की जांच की। हड्डियों की भी जांच की गई। इन सैनिकों के दांतों में ऐसे निशान नहीं मिले हैं जिसके जरिए यह कहा जा सकता है कि वे नॉन वेजिटेरियन थे। वेज और नॉनवेज खाने वाले लोगों के दांतों में दबाव का अंतर आ जाता है यानी नॉनवेज खाते समय दबाव अधिक लगता है, जिससे दांत घिसते हैं और नुकीले होते हैं।
यही नहीं इन सैनिकों के सामने के दो से तीन दांतों की परत भी उतरी हुई मिली है, जिससे साबित होता है कि यह बारूद व गोला की तार तोड़ते थे। शोध में इन सैनिकों के जोश की भी तुलना की गई। उसके लिए नेपोलियन बोनापार्ट व हिटलर की नाजी सेना के मारे गए सिपाहियों के मिले अवशेषों पर हुए शोध से मैच किया गया, जिसमें यह साबित हुआ कि इन सैनिकों में ताकत अपार थी। यह शोधपत्र ब्राजीलियन जर्नल ऑफ फॉरेंसिक साइंस, इंडियन जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च व पोलैंड के जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
1857 की क्रांति में मारे गए सैनिक ताकतवर थे, जो हिटलर व नेपोलियन की सेना जैसा दमखम रखते थे। इनके दांतों में कुछ निशान मिले हैं जो इनेमल हाइपो प्लेजिया रोग के कारण होते हैं। यह तनाव के कारण होता है। बाकी अभी शोध जारी है। सैनिकों को न्याय दिलाना ही हमारा उद्देश्य है। -डॉ. जेएस सहरावत, प्रधान वैज्ञानिक, एंथ्रोपोलॉजी विभाग, पंजाब यूनिवर्सिटी, चंडीगढ़