25-25 लाख रुपये के दो चेक बाउंस होने के मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमआईसी) नाजमीन सिंह की अदालत ने सोलन (हिमाचल प्रदेश) की एक कंपनी के चार पार्टनरों पर एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। साथ ही इन पार्टनरों को दो साल की सजा भी सुनाई है। कंपनी के खिलाफ हिसार की जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई थी।
जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड ने अपने प्रतिनिधि दीपराज के द्वारा शिकायत दी थी कि हिमाचल के सोलन जिले के गांव बलियाना स्थित कुंडल्स लौह उद्योग और उसके साझेदारों ने जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड से ग्रेड ’ए’ के स्पंज आयरन खरीदे थे। इन सभी का कुल बकाया 59,99,393 (लगभग 60 लाख) था।
15 जुलाई 2008 को उन्होंने 25-25 लाख रुपये के दो चेक दिए जो बैंक में लगाने पर बाउंस हो गए। इसके बाद अदालत ने चेक बाउंस के मामले में कंपनी और उसके पार्टनरों तरसेम चंद जैन, राजीव जैन, मनोज बंसल और धर्मवीर के खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के तहत केस दर्ज किया गया।
सुनवाई के बाद अपने बचाव में कंपनी के साझेदारों ने कहा कि वह निर्दोष हैं और उनके पास अब रुपये नहीं हैं। वे जुर्माना नहीं भर पाएंगे। उन्होंने दलील दी कि वह पहले ही कंपनी को 50 लाख रुपये के चेक जारी कर चुके हैं, जो बाउंस हो गए। कुंडल्स लौह उद्योग और इसके सभी साझेदारों को दोषी मानते हुए जज ने कहा कि धारा 138 के तहत अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है और सख्ती से निपटाया जाना आवश्यक है। दोषी किसी भी दया के लायक नहीं हैं।
अदालत ने दोषियों को दो साल की सजा का फैसला भी सुनाया। दोनों केस में शिकायतकर्ता को चेक की राशि (50 लाख रुपये) की दो गुनी राशि देने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने दोगुना जुर्माना इसलिए लगाया, क्योंकि शिकायतकर्ता को मुआवजे के लिए काफी समय तक इंतजार किया है। साथ ही लंबे समय से केस लड़ते हुए उसे मानसिक उत्पीड़न और केस पर खर्च का सामना भी करना पड़ा इसलिए उसको न्याय मिलना चाहिए।