भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ने शहरी स्थानीय निकाय क्षेत्रों में विकास शुल्क बढ़ाने के फैसले को जनता पर अनावश्यक बोझ बताया। उन्होंने कहा कि यह अप्रत्याशित है और मैंने मुख्यमंत्री मनोहर लाल और शहरी स्थानीय निकाय मंत्री कमल गुप्ता से इस बारे में पुनः विचार करने की बात की हैं। उम्मीद है कि वो इस पर दोबारा विचार करेंगे।
विकास शुल्क की नई दरों पर फंसा पेंच, मंथन में जुटी सरकार
स्थानीय शहरी निकाय संस्थाओं में कलेक्टर रेट के आधार पर 5 प्रतिशत विकास शुल्क वसूलने के फैसले को लागू करने पर पेंच फंस गया है। नई दरों का विरोध होने के चलते अब सरकार इस पर दोबारा से मंथन कर रही है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के प्रधान सचिव वी उमाशंकर ने निकाय अधिकारियों के साथ बैठक कर मंथन किया। विभाग के मंत्री डॉ. कमल गुप्ता ने भी अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की है। हालांकि, अभी तक ये तय नहीं हो पाया है कि फैसला वापस लिया जाएगा या फिर लागू रहेगा।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि पहले से विकास शुल्क जमा कर चुके लोगों को राहत देने पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है। कुछ अधिकारियों ने सुझाव दिया है कि जो लोग पहले अपनी प्रापर्टी का पूर्व में नियमानुसार समय पर विकास शुल्क का भुगतान करने वालों से अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूला जाए। इसके अलावा, रेटों में संशोधन को लेकर भी प्रस्ताव रखे गए हैं।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने अधिकारियों के साथ तमाम मुद्दों पर बात की। सरकार की मंशा है कि इस मामले को बजट सत्र से पहले निपटा दिया जाए। इसलिए संभावना जताई जा रही है कि पूरी समीक्षा के बाद दरों में संशोधन हो सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल की मुहर के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस बारे में स्थानीय शहरी निकाय के निदेशक डीके बहरा से लेकर विभाग के मंत्री डॉ. कमल गुप्ता कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। सीएमओ में हुई बैठक को लेकर जब मंत्री कमल गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी वह इस बारे में कुछ भी नहीं बता सकते।