पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देश के सभी शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए वर्ष 2019 में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम की शुरुआत की थी। कार्यक्रम का मकसद 131 शहरों में वर्ष 2024 तक वायु प्रदूषण को कम करना था।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार वायु प्रदूषण के पीएम10 स्तर को 40 प्रतिशत कम करने में पंजाब का कोई शहर शामिल नहीं है। पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश के तीन शहर नालागढ़, परवाणू व सुंदर नगर 40 प्रतिशत तक वायु प्रदूषण कम करने में सफल रहे हैं।
पंजाब में सिर्फ अमृतसर व जालंधर ही ऐसे शहर हैं, जो 30 से 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण को कम करने की कैटेगरी में अपनी जगह बना पाए हैं। इसी तरह उत्तर प्रदेश के वाराणसी, बरेली, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, लखनऊ, आगरा, कानपुर और उत्तराखंड के देहरादून व ऋषिकेश भी 40 प्रतिशत वायु प्रदूषण कम करने में सफल रहे हैं।
नगर निकायों की तरफ से सफाई के लिए स्वीपिंग मशीनें खरीदी जाती हैं और वन विभाग की तरफ से पौधरोपण अभियान भी चलाया जाता है।
वायु प्रदूषण में 95 शहरों में कुछ सुधार
वायु प्रदूषण में सुधार के लिए सरकार की तरफ से पिछले पांच साल में क्या कदम उठाए गए हैं, इस संबंध में राज्यसभा में एक सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में ही पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने यह जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम के तहत 95 शहरों में वायु प्रदूषण में कुछ सुधार हुआ है।
पंजाब के अमृतसर व जालंधर शहर की राज्य में सबसे अच्छी स्थिति है, जो 30 से 40 प्रतिशत प्रदूषण कम करने में सफल रहे हैं। इसी तरह 20 से 30 प्रतिशत प्रदूषण कम करने में खन्ना और डेरा बाबा नानक शहर शामिल है। 10 से 20 प्रतिशत प्रदूषण कम करने में प्रदेश के दो शहर मंडी गोबिंदगढ़ और पटियाला शामिल हैं। इसी तरह लुधियाना सबसे पीछे 1 से 10 प्रतिशत प्रदूषण कम करने की कैटेगरी में ही अपनी जगह बना पाया है।
प्रदेश को 9 शहरों को गैर-प्राप्ति शहरों की सूची में किया था शामिल
इससे पहले केंद्र ने प्रदेश के 9 शहरों को गैर प्राप्ति शहरों की सूची में शामिल किया था। गैर-प्राप्ति उन शहरों को घोषित किया जाता है, जो 5 साल की अवधि में लगातार वायु गुणवत्ता स्तर पीएम-10 के लिए राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानक को पूरा नहीं करते हैं। इन शहरों में डेराबस्सी, गोबिंदगढ़, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, नया नंगल, पठानकोट, पटियाला और अमृतसर को शामिल किया गया था। पीएम10 वायु प्रदूषण का एक स्तर है, जो सभी के स्वास्थ्य को बहुत नुकसान पहुंचाता है। जब प्रदूषण कणों का स्तर वायु में बढ़ जाता है तो सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन आदि होने लगती है।