चंडीगढ़। सोलन की रहने वाली निशा ने दुनिया से जाते हुए तीन लोगों की अंधेरी जिंदगी में रोशनी फैलाई है। 11 जुलाई को अचानक आए पैरालिसिस अटैक के बाद उन्हें पीजीआई में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज विफल होने पर 13 जुलाई को 65 वर्षीय निशा को ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया। जहां उनके परिजनों से मिली अनुमति के बाद निशा का अंगदान कराया गया। अंगदान से मिली दोनों किडनी पीजीआई में भर्ती किडनी के एक गंभीर मरीज में प्रत्यारोपित की गई हैं जबकि दोनों कार्निया दो बच्चों को प्रत्यारोपित हुई हैं।
निशा के पति यशपाल सिंह का कहना है कि हमारे पूरे परिवार की इच्छा थी कि निशा के अंग ऐसे मरीजों को दान दिए जाए जिसे इसकी सख्त जरूरत है। निशा ने दुनिया छोड़ते वक्त भी यह संदेश दिया है कि हम मृत्यु शैया पर भी जीवन बचा सकते हैं।
पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने कहा कि अंगदाता परिवार ने मानवता का संदेश दिया है। ऐसे निर्णय की बदौलत ही सैकड़ों गंभीर रूप से बीमार लोगों को जीवनदान देने में सफलता मिल रही है। पीजीआई के चिकित्सा अधीक्षक व रोटो के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल का कहना है कि अंगदाता परिवार के साथ ही पीजीआई के विशेषज्ञों की टीम का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।