पंजाब कांग्रेस में चल रही कलह चरम पर पहुंची हुई है। शनिवार को नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने लिए उपमुख्यमंत्री का पद मांगे जाने की खबरों का खंडन किया। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके खेमे के इस दावे को साबित करने की चुनौती भी दी कि वह कैबिनेट और पार्टी में महत्वपूर्ण स्थान चाहते थे और उन्होंने कभी उपमुख्यमंत्री या गृह मंत्री का पद मांगा था। सिद्धू ने दावा किया कि उन्होंने कभी ऐसे किसी ओहदे की मांग नहीं की बल्कि उन्होंने कई बार मंत्रिमंडल में शामिल होने की पेशकश को ठुकराया है।
सिद्धू ने उन्होंने इस बात की भी पुष्टि की कि पंजाब कांग्रेस में जारी मौजूदा विवाद को हल करने के लिए पार्टी हाईकमान दखल दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह विवाद सुलझाने की प्रक्रिया के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। अपने ट्वीटर हैंडल पर शनिवार को एक वीडियो क्लिप पोस्ट करते हुए सिद्धू ने कहा कि हालांकि उन्हें कई मौकों पर कैबिनेट में शामिल होने की पेशकश की गई लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। सिद्धू ने ट्वीट किया- “मैं बस पंजाब की समृद्धि चाहता हूं !! कई बार आमंत्रित किया गया और कैबिनेट में शामिल होने की पेशकश की गई लेकिन मैंने स्वीकार नहीं किया, अब हमारे सम्मानित हाईकमान ने हस्तक्षेप किया है, इंतजार करेंगे...।"
उल्लेखनीय है कि नवजोत सिद्धू से स्थानीय निकाय विभाग लेकर जब बिजली विभाग सौंपा गया था, तो उन्होंने कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इस दौरान वे कई बार दिल्ली जाकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से भी मिले थे। तब यह चर्चा जोरों पर रही कि सिद्धू पंजाब में कैप्टन के समकक्ष पद चाहते हैं और इसके लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग कर रहे हैं। सिद्धू को लेकर यह चर्चा भी काफी समय तक चली कि वे पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रधान पद चाहते हैं। बीते माह मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने एक वीडियो इंटरव्यू के दौरान कहा था कि नवजोत सिद्धू उपमुख्यमंत्री पद और गृह विभाग का प्रमुख बनना चाहते थे, जो संभव नहीं था। इस पर सिद्धू ने सबूत दिखाने की चुनौती दी कि उन्होंने पार्टी के किसी अन्य नेता के साथ कोई बैठक की हो या किसी पद की मांग की हो।