बता दें कि चंडीगढ़ के मेयर के चुनाव में जनता वोट नहीं करती है। जनता द्वारा चुने हुए पार्षद इस चुनाव में वोट डालते हैं। पिछले साल 17 जनवरी को मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए चुनाव हुए थे। चुनाव की घोषणा के बाद प्रशासन की तरफ से कहा गया है कि प्रशासन निर्धारित नियमों के अनुपालन में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव प्रक्रिया सुनिश्चित करता है।
भाजपा के पक्ष में आंकड़े, क्रॉस वोटिंग हुई तो बिगड़ सकता है खेल
वर्तमान में मेयर बनाने के लिए भाजपा के पास आंकड़े हैं लेकिन किसी पार्टी के पार्षद ने क्रॉस वोटिंग की तो खेल बिगड़ सकता है। मेयर चुनाव में पार्षदों की तरफ से क्रॉस वोटिंग का अंदेशा बरकरार रहता है। इससे बाजी किसी भी वक्त पलट जाती है। चंडीगढ़ मेयर चुनाव में अक्सर क्रॉस वोटिंग देखने को मिलती है। इसके अलावा वोट डैमेज घोषित होने से भी चुनाव के नतीजों पर प्रभाव पड़ता है। डैमेज वोट की गिनती नहीं की जाती और उसे इनवैलिड (अयोग्य) करारा दे दिया जाता है। क्रॉस वोटिंग और डैमेज वोट जैसे कारणों से पर्याप्त बहुमत नहीं होने के बावजूद भाजपा कई बार बाजी मार चुकी है। मेयर चुनाव में एक वोट सांसद का भी होता है। वर्तमान में भाजपा से सांसद किरण खेर हैं।
चुनावी साल इसलिए नेता चिंता से बेहाल
इस वर्ष मेयर का चुनाव लोकसभा चुनाव के मद्देनजर भी काफी महत्वपूर्ण है। जिस भी दल का मेयर बनेगा, वह लोकसभा चुनाव के लिए अपनी पार्टी की जीत के लिए जमीन तैयार करेगा। लोकसभा चुनाव की जीत और हार काफी हद तक बनने वाले मेयर की घोषणाओं और कार्यों पर भी निर्भर करेगा। 18 जनवरी को जो भी मेयर बनेगा, उसे लोकसभा चुनाव से पहले काम करने के लिए जनवरी के कुछ दिन, फरवरी और मार्च महीने में कुछ दिन मिलेंगे, क्योंकि माना जा रहा है कि मार्च के मध्य या आखिर में आचार संहिता लागू हो सकती है।
वर्तमान में वोट का गणित
- भाजपाः 16 पार्षद + एक सांसद
- आम आदमी पार्टीः 12
- कांग्रेसः 7
- अकाली दलः 1
मेयर पद के योग्य चेहरे
- भाजपाः मनोज सोनकर, लखबीर सिंह बिल्लू
- आम आदमी पार्टीः कुलदीप टीटा, नेहा, पूनम
- कांग्रेसः जसबीर सिंह बंटी, निर्मला देवी